15 जनवरी 2026 को हुए बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव के दौरान मतदान के बाद उंगली पर लगाई गई ‘अमिट स्याही’ (indelible ink) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। ठाकरे बंधुओं (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) ने आरोप लगाया कि पारंपरिक अमिट स्याही की जगह मार्कर पेन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका निशान आसानी से हैंड सैनिटाइजर, एसीटोन या नेल पॉलिश रिमूवर से मिटाया जा सकता है। इससे फर्जी मतदान (multiple voting) की संभावना बढ़ गई है।
राज ठाकरे ने मतदान के बाद प्रेस से कहा, “पहले वाली अमिट स्याही की जगह नया पेन इस्तेमाल हो रहा है। वोट डालकर बाहर आओ, सैनिटाइजर लगाकर स्याही मिटाओ और फिर से वोट डालो। सरकार सत्ता बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है।” उन्होंने कई पोलिंग बूथों से शिकायतें मिलने का दावा किया और चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया। उद्धव ठाकरे ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे “लोकतंत्र की हत्या” बताया और कहा कि स्याही सैनिटाइजर से मिट रही है, जिससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जहां लोग अपनी उंगली से निशान मिटाते दिखे।
राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 2011 से ही मार्कर पेन का इस्तेमाल हो रहा है। मतदाता का रिकॉर्ड सिस्टम में दर्ज होता है, इसलिए सिर्फ स्याही मिटाने से दोबारा वोट नहीं डाला जा सकता। आयोग ने चेतावनी दी कि स्याही मिटाने या भ्रम फैलाने की कोशिश चुनावी गड़बड़ी मानी जाएगी और कानूनी कार्रवाई होगी। बीएमसी ने भी कहा कि आयुक्त भूषण गगरानी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया, और आरोप बेबुनियाद हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोपों को “हार के डर से बनाया बहाना” बताया। नागपुर में वोट डालने के बाद उन्होंने अपनी उंगली दिखाते हुए कहा, “मैंने भी मार्कर से निशान लगवाया है, क्या यह मिट रहा है? अगर समस्या है तो चुनाव आयोग देखे, ऑयल पेंट भी इस्तेमाल कर सकते हैं। विपक्ष हर चीज पर हंगामा कर रहा है।” फडणवीस ने इसे विपक्ष की हार की पूर्व सूचना करार दिया।
यह विवाद बीएमसी चुनाव की गर्मी में ठाकरे गठबंधन (शिवसेना यूबीटी + एमएनएस) के लिए बड़ा मुद्दा बना, जो महायुति (बीजेपी-शिंदे शिवसेना) से मुकाबला कर रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग और सत्ताधारी पक्ष ने इसे राजनीतिक हथकंडा बताया।














