रक्षा और एयरोस्पेस की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। दुनिया की सबसे घातक हाइपरसोनिक मिसाइल ‘जिरकॉन’ (Zircon) के मुख्य डिजाइनर और भारत-रूस की दोस्ती की मिसाल ‘ब्रह्मोस’ प्रोजेक्ट के अहम स्तंभ अलेक्जेंडर लियोनोव का निधन हो गया है। 74 वर्ष की आयु में उन्होंने रविवार को अंतिम सांस ली। रूस के रक्षा क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें ‘गोल्डन स्टार ऑफ हीरो ऑफ लेबर’ जैसे सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जा चुका था।
लियोनोव केवल एक इंजीनियर नहीं, बल्कि आधुनिक मिसाइल तकनीक के जादूगर थे। वे रूसी कंपनी NPOMASH के CEO और मुख्य डिजाइनर थे। लियोनोव नई दिल्ली स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस में रूसी संयुक्त उद्यम भागीदार के रूप में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने न केवल मिसाइल सिस्टम, बल्कि अंतरिक्ष प्रणालियों और तटीय रक्षा प्रणालियों के विकास में भी रूस और भारत के बीच तकनीकी सेतु का काम किया।
लियोनोव की सबसे बड़ी उपलब्धि जिरकॉन (3K22) हाइपरसोनिक मिसाइल को माना जाता है। यह मिसाइल मैक 9 की अविश्वसनीय रफ्तार से चलती है, यानी दुश्मन को पलक झपकने का मौका भी नहीं मिलता। इसकी रेंज 400 से 1,500 किलोमीटर तक है। यह पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ परमाणु वारहेड ले जाने में भी सक्षम है। इसे जहाजों और पनडुब्बियों दोनों से लॉन्च किया जा सकता है, जो इसे समुद्र का सबसे घातक शिकारी बनाता है।
रूसी समाचार पोर्टल RBC के अनुसार, लियोनोव के निधन के कारण और स्थान का खुलासा नहीं किया गया है। उनकी प्रेस सेवा ने इस मामले पर गोपनीयता बनाए रखी है।
लियोनोव का जाना न केवल रूस के लिए, बल्कि भारत के रक्षा कार्यक्रमों के लिए भी एक बड़ी क्षति है। ब्रह्मोस-एनजी जैसी अगली पीढ़ी की हल्की और घातक मिसाइलों के विकास में उनकी दृष्टि हमेशा मार्गदर्शक रहेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लियोनोव ने हाइपरसोनिक हथियारों की रेस में रूस को जो बढ़त दिलाई है, वह दशकों तक कायम रहेगी। भारत और रूस के संयुक्त रक्षा प्रयासों में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।














