उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक ऐसा ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’ हुआ है जिसने सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की रातों की नींद उड़ा दी है। चुनाव आयोग के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी हुई नई मतदाता सूची ने यूपी के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है।
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, यूपी की वोटर लिस्ट से 2.18 करोड़ मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। यह संख्या इतनी बड़ी है कि कई छोटे राज्यों की कुल आबादी भी इसके बराबर नहीं है। इस कटौती के बाद अब प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 13.25 करोड़ रह गई है।
चुनाव आयोग की इस कार्रवाई के पीछे के आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं। पुनरीक्षण से पहले 15.44 करोड़ वोटर थे। पहले चरण में ही 2.89 करोड़ नाम हटाए गए। 3.26 करोड़ लोगों को नोटिस भेजा गया, जिसमें से 1.04 करोड़ नामों का मिलान 2003 की लिस्ट से नहीं हो पाया। प्रक्रिया के दौरान 86.69 लाख नए नाम जोड़े भी गए।
इस भारी कटौती को विपक्ष ने मुद्दा बना लिया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे भाजपा की ‘चुनावी साजिश’ करार दिया है। यूपी कांग्रेस के नेता अनिल यादव का कहना है कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। मुस्लिम, ओबीसी और दलित वोटरों को जानबूझकर निशाना बनाया गया है। वाराणसी से लेकर शामली तक विपक्ष के वोट काटे गए हैं। यह सीधे तौर पर ‘वोट चोरी’ है।”
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा का दावा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इससे फर्जी वोटिंग पर लगाम लगेगी।
भाजपा नेता समीर सिंह का कहना है कि जब भी विपक्ष को अपनी हार सामने दिखती है, वे संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ने लगते हैं। चुनाव आयोग ने पारदर्शिता के साथ काम किया है। भाजपा ने तो बूथ स्तर पर मेहनत कर अपने समर्थकों के नाम जुड़वाए हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2.18 करोड़ वोटों का कम होना महज एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है। यह 2027 के चुनावी नतीजों को पूरी तरह पलटने की ताकत रखता है।
क्या शहरी क्षेत्रों में भाजपा के गढ़ सुरक्षित रहे? क्या विपक्ष के ‘कोर वोट बैंक’ वाले इलाकों में ज्यादा नाम कटे हैं? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब 2027 के नतीजों में छिपेगा। फिलहाल, यूपी की हर छोटी-बड़ी राजनीतिक पार्टी अब अपने ‘गायब’ वोटरों को तलाशने और नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गई है।















