उत्तर प्रदेश में हाल ही में एक के बाद एक इस्तीफों का सिलसिला जारी है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए यूजीसी नियमों को “काला कानून” बताते हुए इस्तीफा दे दिया था, जिसमें उन्होंने इन नियमों को जातिगत असंतोष फैलाने वाला और भेदभावपूर्ण बताया था। अब इसी कड़ी में अयोध्या संभाग के राज्यकर विभाग (जीएसटी) में तैनात डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अपना पद छोड़ दिया है।
मंगलवार को प्रशांत कुमार सिंह ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को दो पन्नों का इस्तीफा भेजा। इस्तीफे में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा सीएम योगी पर की गई कथित अभद्र टिप्पणियों से वे गहरे आहत हैं। प्रशांत कुमार सिंह ने अपने बयान में कहा, “जिस प्रदेश का नमक खाता हूं, जहां से मुझे वेतन मिलता है, मैं उसका पक्षधर हूं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए मुख्यमंत्री हैं और उनका अपमान मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों से इस टिप्पणी से उन्हें मानसिक पीड़ा हो रही थी, और उनका दिल भी है, संवेदनाएं भी हैं। इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। इस्तीफे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी के प्रति समर्थन भी जताया। इस्तीफा देने के बाद प्रशांत सिंह भावुक हो गए और उन्होंने अपनी पत्नी को फोन कर रोते हुए बताया, “सीएम योगी के समर्थन में मैंने इस्तीफा दे दिया।” यह वीडियो और बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जिसमें उनकी भावुकता साफ दिख रही है।
आपको बता दें कि प्रशांत कुमार सिंह का जन्म 28 अक्टूबर 1978 को मऊ जनपद के शर्मा गांव में हुआ। उन्होंने हाई स्कूल जीवन राम इंटर कॉलेज से और इंटर विद्युत परिषद स्कूल टांडा से किया। स्नातक उदय प्रताप महाविद्यालय, वाराणसी से और एलएलबी सिविल आजमगढ़ से पूरी की। उनकी पहली जॉइनिंग 2013 में सहारनपुर में हुई थी। वर्तमान में वे अयोध्या में जीएसटी डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात थे।यह घटना शंकराचार्य विवाद से जुड़ी है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी पर कुछ टिप्पणियां की थीं, जिन्हें कई लोग अपमानजनक मान रहे हैं।
इससे पहले बरेली मजिस्ट्रेट का इस्तीफा यूजीसी नियमों से जुड़ा था, लेकिन अब यह नया इस्तीफा अलग मुद्दे (शंकराचार्य टिप्पणी) पर है, जिससे सूबे में राजनीतिक बवाल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर इस्तीफों का यह दौर उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है, और देखना होगा कि आगे क्या राजनीतिक – प्रशासनिक परिणाम निकलते हैं।































