पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और लोकसभा में पार्टी के पूर्व नेता अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका में नजर आ सकते हैं। चर्चा है कि कांग्रेस हाईकमान उन्हें उनके गढ़ बहरामपुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो अधीर रंजन चौधरी लगभग 26 साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ते नजर आएंगे।
अधीर रंजन चौधरी के मैदान में उतरने से बहरामपुर का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। यहाँ इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है:
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कांग्रेस: अधीर रंजन चौधरी (संभावित)
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भाजपा: सुब्रता मैत्रा (वर्तमान विधायक)
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तृणमूल कांग्रेस (TMC): नाडुगोपाल मुखर्जी
बहरामपुर के ‘रॉबिनहुड’ कहे जाने वाले अधीर रंजन चौधरी के लिए यह चुनाव महज एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि बंगाल में कांग्रेस के अस्तित्व को फिर से जीवित करने की चुनौती है। आपको बता दें कि 1996 में नबग्राम से विधायक चुने गए अधीर 1999 में पहली बार सांसद बने थे। 25 सालों तक बहरामपुर के सांसद रहने के बाद, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें TMC के यूसुफ पठान से हार का सामना करना पड़ा था।
वर्तमान में बहरामपुर विधानसभा सीट भाजपा के सुब्रता मैत्रा के पास है, जिन्होंने पिछले चुनाव में यहाँ जीत दर्ज की थी। कांग्रेस हाईकमान अधीर रंजन चौधरी को बंगाल की राजनीति में फ्रंट फुट पर लाने की सोच रहा है। प्रदेश कांग्रेस ने भी इस पर सहमति जताई है। अंतिम मुहर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लगेगी।
वर्तमान में अधीर रंजन चौधरी के पास प्रदेश अध्यक्ष (अब सुभंकर सरकार) या लोकसभा में नेता जैसी कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि वे अपनी पूरी ऊर्जा बंगाल विधानसभा में पार्टी को मजबूती देने में लगाएं। क्या ‘बहरामपुर के बेताज बादशाह’ अपनी खोई हुई विरासत को वापस पा सकेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।















