लोकसभा में “किताब बनाम किताब” की राजनीति ने संसद को गरमा दिया है। यह पूरा विवाद किताबों के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जहां एक तरफ कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित (या विवादित) किताब “Four Stars of Destiny” का हवाला देकर मोदी सरकार पर 2020 के भारत-चीन सीमा गतिरोध के दौरान प्रधानमंत्री की कथित निष्क्रियता और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने जवाबी हमले में नेहरू-गांधी परिवार पर कई पुरानी और कथित रूप से प्रतिबंधित किताबें दिखाकर उनके इतिहास को “झूठ, मक्कारी, भ्रष्टाचार और देश तोड़ने” से जोड़ दिया। राहुल गांधी ने बुधवार को संसद पहुंचकर नरवणे की किताब की कॉपी दिखाई और दावा किया कि जब चीनी टैंक भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व सेना प्रमुख को “जो उचित समझो वो करो” कहकर जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। उन्होंने कहा कि यदि पीएम सदन में आएं तो वे खुद यह किताब उन्हें गिफ्ट करेंगे। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार किताब के अस्तित्व से इनकार कर रही है, जबकि यह मौजूद है (कुछ रिपोर्ट्स में इसे विदेश में उपलब्ध बताया गया है, लेकिन भारत में रक्षा मंत्रालय की मंजूरी लंबित है)।
इस मुद्दे पर सोमवार से ही संसद में हंगामा चल रहा था। राहुल को स्पीकर ने नियमों (रूल 349 और 353) का हवाला देकर अप्रकाशित किताब के अंश पढ़ने से रोका, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने वेल में जाकर विरोध किया और कई सांसदों को निलंबित भी किया गया।इसके साथ ही बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के हमले का पलटवार करते हुए सदन में कई किताबें लेकर पहुंचे और कहा कि राहुल एक “बिना छपी किताब” पर संसद को तीन दिनों से “बंधक” बनाए हुए हैं।
उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के खिलाफ कई किताबों का जिक्र किया, जैसे “Edwina and Nehru” (माउंटबेटन और एडविना के साथ नेहरू के कथित संबंध और बंटवारे की साजिश का आरोप) अन्य किताबें जिनमें इंदिरा गांधी पर व्यक्तिगत संबंधों और भ्रष्टाचार। दुबे ने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार का इतिहास “झूठ, मक्कारी, भ्रष्टाचार और देश तोड़ने” का है, और वे राजशाही में जी रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इन छपी हुई किताबों पर भी सदन में बहस हो, जो कथित रूप से भारत में प्रतिबंधित हैं।
आईये अब आपको बताते हैं कि संसद में क्या हुआ? दुबे के बयानों पर कांग्रेस सांसद भड़क गए, कागज फाड़कर स्पीकर की ओर फेंके गए। सदन बार-बार स्थगित हुआ। कांग्रेस सांसद स्पीकर ओम बिरला के पास पहुंचे और दुबे के बयानों पर शिकायत की, जबकि बीजेपी सांसदों ने भी जवाबी बहस की। प्रियंका गांधी ने इसे “लोकतंत्र का अपमान” बताया, जबकि दुबे ने 2014 से पहले की “सच्चाई” पर बहस की मांग की।
यह घटना दिखाती है कि संसद में अब किताबें राजनीतिक हथियार बन गई हैं। राहुल गांधी राष्ट्रीय सुरक्षा और मोदी सरकार की कमजोरी पर हमला कर रहे हैं, जबकि बीजेपी नेहरू-गांधी परिवार की ऐतिहासिक छवि पर सवाल उठाकर कांग्रेस को घेर रही है। दोनों तरफ “डबल स्टैंडर्ड” के आरोप लग रहे हैं—एक तरफ अप्रकाशित किताब पर रोक, दूसरी तरफ पुरानी किताबों से विवादास्पद उद्धरण। यह विवाद बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के बीच हुआ, जो अब और गरमाने की संभावना है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है।








































