गुजरात के मोरबी जिले के 23 वर्षीय साहिल मोहम्मद हुसैन की कहानी रूस-यूक्रेन युद्ध की क्रूरता और धोखे की एक और मिसाल है। छात्र वीजा पर 2024 में पढ़ाई के लिए रूस गए साहिल पार्ट-टाइम कूरियर जॉब कर रहे थे। तभी रूसी पुलिस ने उन्हें झूठे ड्रग्स केस में फंसाया। ब्लैकमेल करते हुए कहा गया कि 7 साल की जेल से बचना है तो रूसी सेना में शामिल हो जाओ – केस खत्म कर देंगे।मजबूरन साहिल ने हामी भर दी। मात्र 15-16 दिनों की ट्रेनिंग के बाद उन्हें यूक्रेन की फ्रंटलाइन पर भेज दिया गया। लेकिन वहां पहुंचते ही साहिल ने हथियार डाल दिए और यूक्रेनी सेना के सामने सरेंडर कर दिया। अब वे यूक्रेनी फोर्सेस की कैद में हैं, जहां से उन्होंने दो वीडियो मैसेज जारी किए।
वीडियो में साहिल ने भावुक अपील की: “मैं बहुत निराश हूं, घर वापस आना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार से गुजारिश है कि मेरी मदद करें। हाल ही में पुतिन भारत आए थे, उनसे बात करके मुझे सुरक्षित लाएं।” उन्होंने अन्य भारतीय युवकों को चेतावनी दी – “रूस आने वाले सभी युवाओं से कहता हूं, बहुत सावधान रहें। यहां ढेर सारे स्कैमर हैं। किसी भी हालत में रूसी सेना में न शामिल हों, यह जानलेवा है।”
यूक्रेनी अधिकारियों ने ये वीडियो साहिल की मां को भेजे और भारतीयों को जागरूक करने को कहा। मां ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, अगली सुनवाई फरवरी में है।यह अकेला मामला नहीं। संसद को दी जानकारी के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद 200+ भारतीय रूसी सेना में भर्ती हुए – ज्यादातर एजेंट्स के झांसे में। इनमें 26 की मौत हो चुकी, 7 लापता और 50 अभी फंसे हैं। भारत सरकार लगातार रूस से बात कर रही है और कई को वापस ला चुकी है। विदेश मंत्रालय बार-बार चेतावनी जारी कर रहा: रूसी सेना के किसी ऑफर से दूर रहें।साहिल की कहानी हमें सिखाती है कि विदेशी सपनों के चक्कर में सावधानी बरतें, वरना जिंदगी दांव पर लग सकती है।








