राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हालिया मुलाकात ने देश के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। जन्मदिन के अवसर पर परिवार के साथ हुई इस ‘शिष्टाचार भेंट’ को महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसके पीछे छिपे गहरे सियासी मायनों और भविष्य की रणनीतियों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। सूत्रों और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस मुलाकात के बाद चार प्रमुख स्थितियां उभर कर सामने आ रही हैं।
पहली संभावना यह जताई जा रही है कि पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में वसुंधरा राजे का कद यथावत रखा जा सकता है। चर्चा है कि नितिन नवीन की नई टीम में उन्हें दोबारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, अंदरूनी हलकों से यह खबर भी आ रही है कि राजे खुद अब संगठन के बजाय सक्रिय प्रशासनिक या सरकारी भूमिका में अधिक रुचि दिखा रही हैं।
सबसे प्रबल अटकलें वसुंधरा राजे के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिवराज सिंह चौहान, नीतीश कुमार और सर्वानंद सोनोवाल की तर्ज पर राजे को भी केंद्र सरकार में अहम विभाग सौंपा जा सकता है। राजस्थान में आगामी तीन महीनों में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजकर केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
तीसरी संभावना उन्हें किसी बड़े और महत्वपूर्ण राज्य का राज्यपाल (गवर्नर) बनाए जाने की है। बताया जाता है कि पहले भी उन्हें इस पद का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उस समय वह निर्णय नहीं ले पाई थीं। क्या इस बार वह राजभवन जाने के लिए तैयार होंगी? यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
चौथी अटकल राजस्थान की राजनीति में उनकी दोबारा सक्रियता को लेकर है। हालांकि, राज्य के वर्तमान समीकरणों को देखते हुए फिलहाल इसकी संभावना न के बराबर नजर आ रही है। आलाकमान की रणनीति अभी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करने की अधिक दिख रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई इस मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि वसुंधरा राजे अभी भी भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अब गेंद हाईकमान के पाले में है कि वह ‘महारानी’ को किस नई भूमिका में देखना चाहता है। फिलहाल, राजस्थान से लेकर दिल्ली तक सबकी नजरें अगले आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं।
















