केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट है, जो भारतीय संसदीय इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है। बजट की प्रस्तुति रविवार को हो रही है, जो कई दशकों बाद ऐसा मौका है। बजट भाषण की शुरुआत में वित्त मंत्री ने माघ पूर्णिमा और संत गुरु रविदास जयंती के पावन अवसर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जी की जयंती के शुभ अवसर पर यह बजट देश के लिए शुभ संकेत लेकर पेश किया जा रहा है।”
सीतारमण ने जोर दिया कि सरकार ने हमेशा दिखावे के बजाय जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हर निर्णय में आम लोगों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। लगातार आर्थिक सुधारों और नीतियों के परिणामस्वरूप भारत ने 7 प्रतिशत की उच्च विकास दर हासिल की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता अर्थव्यवस्था का मूल मंत्र बनी हुई है, और देश अब ‘विकसित भारत’ की दिशा में विश्वास से भरे कदम बढ़ा रहा है। यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी।
वित्त मंत्री ने बजट के तीन प्रमुख मुद्दों पर जोर दिया :
- आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा देना — निवेश, उद्योग और रोजगार सृजन को मजबूत करना।
- जनता की उम्मीदों को पूरा करना — सामान्य नागरिकों को अधिक सुविधाएं और अवसर प्रदान करना।
- सबका साथ, सबका विकास — विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाना।
उन्होंने कहा कि सरकार के फैसलों से नागरिकों को लाभ पहुंचाने की पूरी कोशिश की गई है। 7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है, और यह प्रगति ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की ओर अग्रसर है। बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बजट की प्रति सौंपी। बजट में आर्थिक स्थिरता, समावेशी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों पर फोकस की उम्मीद है।
पूरे देश की नजरें अब बजट के विस्तृत प्रावधानों, टैक्स राहत, सेक्टर-विशेष घोषणाओं और राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर टिकी हुई हैं।यह बजट वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है और ‘विकसित भारत @2047′ के विजन को मजबूती प्रदान करने वाला माना जा रहा है।





































