कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, और नासिक के स्वयंभू ‘चमत्कारी बाबा’ कैप्टन अशोक खरात के मामले में यह बात सच साबित हो रही है। श्रद्धा, शक्ति और चमत्कार का झांसा देकर महिलाओं का शारीरिक शोषण करने वाला यह शख्स अब सलाखों के पीछे है। जैसे-जैसे विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश आगे बढ़ रही है, खरात के ‘पाप के साम्राज्य’ से ऐसी परतें उठ रही हैं, जिन्हें सुनकर रूह कांप जाए।
इस पूरे मामले की पटकथा किसी थ्रिलर फिल्म जैसी है। 29 दिसंबर 2025 को अशोक खरात खुद पुलिस के पास पहुंचा और 5 करोड़ की फिरौती मांगे जाने की शिकायत दर्ज कराई। उसने दावा किया कि उसे “व्यू वन्स” मोड में अश्लील फोटो भेजकर ब्लैकमेल किया जा रहा है। लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स और पुलिस की पैनी नजरों से वह खुद को बचा नहीं सका। जब जांच में ब्लैकमेलिंग के सबूत नहीं मिले, तो पुलिस का शक खरात पर गहरा गया।
असली मोड़ 18 फरवरी 2026 को आया, जब शिर्डी की एक महिला ने खरात के खिलाफ शिकायत की। हालांकि जांच कठिन थी, लेकिन एक चश्मदीद गवाह ने पुलिस को वो वीडियो सौंप दिए जिसने केस की दिशा ही बदल दी। इन वीडियो में खरात को महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया। आरोप है कि वह महिलाओं को अनुष्ठान और दैवीय शक्तियों के नाम पर फंसाता और फिर उनका यौन शोषण करता था।
17 मार्च को एक पीड़िता ने सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा किया। पीड़िता के अनुसार, खरात ने उसे अपने ऑफिस बुलाकर नशीला पदार्थ पिलाया और बेहोशी की हालत में उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया।
गिरफ्तारी के बाद हुई छापेमारी में पुलिस के हाथ जो लगा, उसने सबको हैरान कर दिया नासिक, शिर्डी, पुणे और पनवेल में बंगले और फार्महाउस। अनुमानित 40 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति। भारी नकदी, डिजिटल रिकॉर्डिंग डिवाइस, लैपटॉप और अवैध हथियार।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 मार्च को SIT का गठन किया गया था। अब जांच इस एंगल पर भी घूम रही है कि क्या खरात को किसी बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक अधिकारी का संरक्षण प्राप्त था? पुलिस अब खरात के सहयोगियों और उसके आर्थिक लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है।
प्रशासन ने साफ किया है कि पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले मीडिया संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही, अन्य पीड़ितों को भी निडर होकर सामने आने का भरोसा दिया गया है।















