चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में घरेलू महिला (हाउसवाइफ) की भूमिका को सिर्फ देखभाल तक सीमित नहीं माना, बल्कि उसकी बहुआयामी और आर्थिक योगदान को मान्यता देते हुए मोटर एक्सीडेंट क्लेम में परिवार को मिलने वाला मुआवजा दोगुना से ज्यादा बढ़ाकर 1.18 करोड़ रुपये कर दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला 18 जनवरी 2026 को आया, जिसमें कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के 2016 के पुराने अवॉर्ड को संशोधित किया। मामला 8 अक्टूबर 2014 को हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें एक घरेलू महिला को गंभीर सिर की चोटें आईं और मल्टीपल हेमोरेजिक कंट्यूशंस हुईं, जिससे उनकी मौत हो गई। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने उनकी नॉटिकल इनकम को कम आंकते हुए कुल मुआवजा 58.22 लाख रुपये तय किया था। अपील में परिवार ने तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल ने महिला की आय को बहुत कम आंका और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों (जैसे जसबीर सिंह केस) का पालन नहीं किया।

जस्टिस (नाम उपलब्ध नहीं, लेकिन रिपोर्ट में उल्लेख) ने फैसले में कहा कि हाउसवाइफ का काम सिर्फ देखभाल तक सीमित नहीं है। वह घर की वित्तीय योजना, किराना खरीद, बच्चों की शिक्षा, घरेलू प्रबंधन और भावनात्मक समर्थन जैसी जिम्मेदारियां निभाती है। कोर्ट ने जोर दिया कि इन सेवाओं का आर्थिक मूल्य है, जो अनस्किल्ड वर्कर की न्यूनतम मजदूरी से तुलना नहीं की जा सकती। 2014 में दुर्घटना होने के कारण, कोर्ट ने नॉटिकल इनकम को उचित स्तर पर रिवाइज किया (ट्रिब्यूनल के 9,000 रुपये की बजाय ज्यादा), फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स (40% तक बढ़ोतरी), मल्टीप्लायर मेथड और अन्य फैक्टर्स (जैसे उम्र, डिपेंडेंट्स) को ध्यान में रखा।
इससे पुराना अवॉर्ड 58.22 लाख से बढ़ाकर 1.18 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें इंटरेस्ट और अन्य कंपोनेंट्स शामिल हैं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला दिया, जहां हाउसवाइफ की सेवाओं को आर्थिक योगदान के रूप में मान्यता दी जाती है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह फैसला घरेलू महिलाओं के अदृश्य योगदान को मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो समाज में उनकी भूमिका को नई परिभाषा देता है।यह निर्णय उन हजारों मामलों के लिए मिसाल बनेगा जहां हाउसवाइफ की मौत पर कम मुआवजा दिया जाता रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “हाउसवाइफ” शब्द से उनकी भूमिका को कम नहीं आंका जा सकता—वह परिवार की रीढ़ होती हैं, और उनका नुकसान आर्थिक-भावनात्मक दोनों स्तर पर गहरा होता है।