केंद्रीय बजट 2026-27 में उन राज्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं—असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी। बजट में पॉपुलिस्ट मुफ्त योजनाओं या डायरेक्ट फ्रीबीज से बचते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, रेयर अर्थ मिनरल्स, पर्यटन और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट जैसी संरचनात्मक घोषणाओं पर फोकस रहा।
यह बजट इन चुनावी राज्यों में विकास के माध्यम से राजनीतिक संदेश देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन जगहों पर जहां बीजेपी सत्ता में नहीं है (जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल)। कुल मिलाकर, बजट विकास-केंद्रित रहा, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया, लेकिन कोई बड़ा व्यक्तिगत लाभ या कैश ट्रांसफर नहीं दिया गया।
प्रमुख चुनावी राज्यों को क्या मिला?
पश्चिम बंगाल — वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर। डांकुनी (कोलकाता के पास) से सूरत तक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (पर्यावरण-अनुकूल माल ढुलाई के लिए)। ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में दुर्गापुर को प्रमुख इंडस्ट्रियल नोड के रूप में विकसित करना। पूर्वोत्तर राज्यों (बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा, आंध्र) में 5 नए पर्यटन डेस्टिनेशन विकसित करने की योजना। TMC ने इसे “राजनीतिक सिग्नलिंग” करार दिया और कहा कि बंगाल को पर्याप्त नहीं मिला।
तमिलनाडु — ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश के साथ रेयर अर्थ कॉरिडोर (माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग के लिए)। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (चेन्नई-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई आदि सहित)। पुलिकट झील पर बर्डवॉचिंग ट्रेल्स। खनिज संसाधनों और बेहतर कनेक्टिविटी से फायदा, लेकिन DMK सरकार ने इसे अपर्याप्त बताया।
केरल — रेयर अर्थ कॉरिडोर में शामिल (ओडिशा, आंध्र, तमिलनाडु के साथ)। तटीय क्षेत्रों में टर्टल ट्रेल्स (कछुआ संरक्षण और प्रमोशन साइट्स)। काजू, नारियल और कोको जैसे कैश क्रॉप किसानों को समर्थन। LDF सरकार ने इसे कमजोर बताया, क्योंकि हाई-स्पीड रेल या AIIMS जैसी बड़ी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं।
असम — इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ में मजबूत फोकस। टियर-2/3 शहरों (मंदिर शहरों सहित) में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 5 साल में ₹20,000 करोड़। तेजपुर में NIMHANS-जैसे मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट का अपग्रेड। बौद्ध सर्किट और फ्लड मिटिगेशन पर निरंतर जोर (पिछले बजटों की तरह)। बीजेपी सरकार होने से यहां लाभ ज्यादा स्पष्ट दिख रहा है।
पुडुचेरी — ब्लू इकोनॉमी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुछ फायदा, लेकिन ज्यादा स्पेसिफिक ऐलान नहीं।
कुल मिलाकर, बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर जोर था, न कि पॉपुलिस्ट स्कीम्स पर। कई विपक्षी नेता (जैसे ममता बनर्जी और केरल के मंत्री) ने इसे “पक्षपाती” या “अपर्याप्त” बताया, जबकि केंद्र ने इसे “विकास-उन्मुख” और सभी राज्यों के लिए संतुलित करार दिया। चुनावी नजरिए से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को सबसे ज्यादा संरचनात्मक सौगातें दिखीं, जबकि असम में बीजेपी की पकड़ मजबूत बनी रहेगी।