केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया है। इस बजट में राजकोषीय घाटे को 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का अनुमान जताया गया है। कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। बजट में करदाताओं, निवेशकों, किसानों, मध्यम वर्ग और उद्योगों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।
इस बजट पर विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि वे कल संसद के मंच का उपयोग करके इस पर विस्तार से अपनी राय रखेंगे। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने टिप्पणी की कि बजट भाषण में बहुत कम विवरण हैं। उन्होंने कहा कि केरल के लिए घोषणाओं का इंतजार था, लेकिन कुछ नहीं मिला। लंबे समय से एम्स की मांग थी, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा से किसी उम्मीद की नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है। आम आदमी, किसान, गरीब और ग्रामीणों के लिए यह समझ से परे है। बुनियादी ढांचे, उत्पादन मूल्य, मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर किया गया है। महंगाई नियंत्रण, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इसे सबसे निराशाजनक बजट बताया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के सदस्य भी इसे मनोबल गिराने वाला और धोखे वाला मान रहे हैं। किसानों, युवाओं के रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिए कुछ नहीं है। यह एक खोखला खिलौना जैसा है, जिसमें कोई असर नहीं। 2,300 से ज्यादा यूनिट्स के बंद होने की बात से ही इसकी सच्चाई पता चलती है।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि बजट में कुछ खास नहीं है। पहले पूरा परिवार बजट देखता था, लेकिन इस बार महिलाओं और युवाओं के लिए कुछ भी नहीं। सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए था, लेकिन इन क्षेत्रों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने इसे केरल के लिए बेहद निराशाजनक बताया। हाई-स्पीड रेल जैसी बड़ी परियोजनाओं की उम्मीद थी, लेकिन कुछ घोषित नहीं हुआ। चुनाव नजदीक होने के बावजूद केरल को नजरअंदाज किया गया।
लोकसभा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि युवाओं, मध्यम वर्ग, खिलाड़ियों, किसानों या महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया गया। यह एक ‘फेकू’ बजट है, जो पीएमओ में तैयार हुआ है, इसलिए प्रधानमंत्री इसकी तारीफ कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे खाली डिब्बा करार दिया। इसमें कुछ भी नहीं है। निर्यातकों को राहत मिलनी चाहिए थी, लेकिन कुछ नहीं। किसानों का जिक्र तक नहीं। अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर प्रभावित निर्यातकों के लिए भी कोई मदद नहीं। पहले लगा था कि पुरानी चीजें तो होंगी, लेकिन वह भी हटा दी गईं।
कुल मिलाकर, सरकार इसे विकास और पूंजी निवेश पर केंद्रित बता रही है, जबकि विपक्ष इसे आम जनता, किसानों, युवाओं और क्षेत्रीय जरूरतों से दूर मान रहा है।





































