बिहार की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद अब कयासों का बाजार गर्म है कि सूबे की कमान किसके हाथ में होगी और कब होगी। संवैधानिक मजबूरियों और राजनीतिक दांव-पेंच के बीच नीतीश कुमार के पास अभी ‘छह महीने’ का एक ऐसा कार्ड है, जो बिहार की सियासी तस्वीर बदल सकता है।
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च 2026 को हुए मतदान में एनडीए ने क्लीन स्वीप किया था। नीतीश कुमार इस चुनाव में विजयी घोषित हुए। नियम के मुताबिक, राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के 14 दिनों के भीतर व्यक्ति को अपने वर्तमान सदन (विधान परिषद) की सदस्यता से इस्तीफा देना होता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या MLC पद से इस्तीफा देते ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी होगी? इसका जवाब है— नहीं। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य रहे भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री के पद पर बना रह सकता है। बस शर्त यह है कि उसे 6 महीने के भीतर राज्य के किसी सदन की सदस्यता लेनी होगी।
नीतीश कुमार तकनीकी रूप से सितंबर 2026 तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। जेडीयू के कुछ अंदरूनी सूत्र संकेत दे रहे हैं कि इस नियम का लाभ उठाते हुए नई सरकार के गठन या नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को फिलहाल टाला जा सकता है।
भले ही नीतीश कुमार के पास समय है, लेकिन सवाल अभी भी वही है, अगला मुख्यमंत्री कौन? राज्यसभा जाने के फैसले के बाद यह साफ है कि नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे, लेकिन बिहार की कमान किसे सौंपी जाएगी, इस पर एनडीए के भीतर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। क्या नीतीश सितंबर तक अपनी पारी खींचेंगे या 30 मार्च के आसपास ही किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।















