तमिलनाडु की राजनीति में 11 मई 2026 की तारीख सिर्फ एक मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के लिए नहीं, बल्कि छह दशकों पुरानी एक सांस्कृतिक पहचान के बदलने के लिए याद रखी जाएगी। जब थलापति जोसेफ विजय ने चटक सफेद शर्ट और काली पैंट में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो फोर्ट सेंट जॉर्ज सचिवालय का नजारा ऐतिहासिक था।
क्या तमिलनाडु की राजनीति से लाल और काली धारी वाली धोती (Karai Veshti) हमेशा के लिए गायब हो गई है? आइए समझते हैं इस बदलाव के मायने।
1. परंपरा का टूटना: धोती बनाम मॉडर्न आउटफिट
पिछले 60 वर्षों से तमिलनाडु की सत्ता का मतलब \’कराई वेस्ती\’ (द्रविड़ पहचान वाली धोती) रहा है। कामराज, एम.जी. रामचंद्रन, करुणानिधि, जयललिता और एम.के. स्टालिन—इन सभी ने धोती को ही अपना राजनीतिक कवच बनाया। जोसेफ विजय ने पैंट-शर्ट चुनकर यह साफ कर दिया कि उनकी राजनीति \’प्रोफेशनल और परिणाम-केंद्रित\’ है। यह केवल पहनावा नहीं, बल्कि पुरानी रूढ़ियों से आजादी का प्रतीक है।
2. TVK के 108 विधायक: युवाओं का नया \’ड्रेस कोड\’
विजय की पार्टी \’तमिलगा वेत्री कड़गम\’ (TVK) के अधिकांश विधायक 25 से 45 वर्ष की आयु के हैं। शपथ ग्रहण के दौरान ये युवा विधायक लुंगी या धोती के बजाय फॉर्मल पैंट-शर्ट और ब्लेजर में नजर आए। बदलाव की हवा ऐसी चली कि उदयनिधि स्टालिन भी पैंट और टी-शर्ट में नजर आए। सोशल मीडिया पर इसे ‘पॉलिटिक्स 2.0’ कहा जा रहा है।
3. विचारधारा में बदलाव: सनातन विरोध से समावेशी पहचान तक
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बदलाव केवल कपड़ों तक सीमित नहीं है। DMK शासन के दौरान \’सनातन उन्मूलन\’ जैसे बयानों ने काफी विवाद पैदा किया था। विजय ने इस विचारधारा से दूरी बनाकर एक \’समावेशी तमिल पहचान\’ पेश की है। विजय के भाषणों में जहां तमिल अस्मिता का गर्व है, वहीं राष्ट्रीय एकता की भी झलक मिलती है।
4. क्या यह \’द्रविड़ राजनीति\’ के अंत का संकेत है?
चेन्नई की सड़कों पर अब लाल-काली धारी वाली धोती के बजाय पीले और मैरून पार्टी झंडों के साथ जींस-टीशर्ट पहने कार्यकर्ता दिख रहे हैं। विजय ने साबित किया कि तमिल होने के लिए धोती पहनना अनिवार्य नहीं है। यह शहरी मतदाताओं और तकनीक से जुड़ी युवा पीढ़ी के लिए एक \’कनेक्ट\’ पैदा करने का तरीका है। तमिलनाडु अब पहचान की राजनीति (Identity Politics) से निकलकर विकास और शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहा है।
जोसेफ विजय तमिलनाडु के इतिहास के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं जिन्होंने पैंट-शर्ट में शपथ ली। अब सवाल यह है कि क्या यह \’कॉर्पोरेट लुक\’ वाली सरकार तमिलनाडु की बुनियादी समस्याओं—जैसे शिक्षा, बेरोजगारी और तकनीक—को उतनी ही आधुनिकता से सुलझा पाएगी? तमिलनाडु अब \’धोती युग\’ को पीछे छोड़कर \’पेंट-शर्ट\’ वाली आधुनिकता की रेस में शामिल हो चुका है।