फिल्मों में जब काले कपड़ों में चेहरे ढके कमांडो रस्सी से उतरते हुए या सेकंडों में ऑपरेशन खत्म करते दिखते हैं, तो वह दृश्य रोमांच पैदा करता है। लेकिन असल जिंदगी में SWAT (Special Weapons and Tactics) कमांडो बनना रोमांच नहीं, बल्कि लोहे जैसी इच्छाशक्ति, अनुशासन और असाधारण मानसिक मजबूती की परीक्षा है। आइए जानते हैं कि आखिर एक SWAT कमांडो बनने की राह कितनी कठिन होती है।
SWAT यूनिट एक एलीट फोर्स होती है। इसमें बाहर से कोई सीधी भर्ती नहीं होती। जो पुलिसकर्मी पहले से सेवा में हैं, वही SWAT में शामिल होने का सपना देख सकते हैं। इसके लिए पहले नियमित पुलिस ट्रेनिंग पूरी करनी होती है। कुछ साल तक एक्टिव ड्यूटी में काम करना होता है। सर्विस रिकॉर्ड बेदाग और प्रदर्शन उत्कृष्ट होना चाहिए।
आपको बता दें कि सिलेक्शन की पहली सीढ़ी है सख्त स्क्रीनिंग। उम्मीदवारों को इन आधारों पर परखा जाता है—
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सर्विस रिकॉर्ड
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अनुशासन
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फिजिकल फिटनेस
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मेडिकल रिपोर्ट
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पिछले वर्षों का प्रदर्शन
जिनका रिकॉर्ड साफ और प्रदर्शन लगातार अच्छा होता है, वही अगले चरण तक पहुंचते हैं।
शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को कठोर शारीरिक और मानसिक जांच से गुजरना पड़ता है। इसमें शामिल हैं—
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लंबी दूरी की एंडोरेंस रन
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ऑब्सटेकल कोर्स
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स्ट्रेंथ टेस्ट
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लॉन्ग जंप और अन्य फिजिकल ड्रिल
लेकिन सिर्फ ताकत काफी नहीं। उम्मीदवारों की मानसिक मजबूती भी परखी जाती है— क्या वे डर, तनाव और अचानक पैदा हुई जानलेवा स्थिति में सही फैसला ले सकते हैं? एक उदाहरण के तौर पर आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस SWAT की ट्रेनिंग लगभग 10 महीने तक चलती है। करीब 9 महीने तक बेसिक और एडवांस्ड ड्रिल के प्रोसेस के गुजरना पड़ता है। इसके साथ ही 20–25 किलो वजन उठाकर लंबी दौड़, रॉक क्लाइंबिंग, पैराशूट से जुड़ी एक्सरसाइज और क्लोज क्वार्टर बैटल ट्रेनिंग भी पूरी प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
इतना ही नहीं ट्रेनिंग का सबसे कठिन हिस्सा है—नींद की कमी। ट्रेनी को कई बार सिर्फ 3 से 4 घंटे की नींद दी जाती है। उद्देश्य यह है कि असली ऑपरेशन में थकान और दबाव के बावजूद वे पूरी क्षमता से काम कर सकें। यह रास्ता आसान नहीं है। चयन और ट्रेनिंग के दौरान लगभग 70% से 80% उम्मीदवार बाहर हो जाते हैं। अंत में केवल वही लोग बचते हैं जिनकी शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक संतुलन भी असाधारण होता है।
SWAT(Special Weapons and Tactics) कमांडो उन परिस्थितियों में तैनात किए जाते हैं, जहां सामान्य पुलिस बल के लिए ऑपरेशन करना जोखिम भरा हो जैसे आतंकवाद विरोधी कार्रवाई, बंधक मुक्ति अभियान, हाई-रिस्क छापेमारी, भारी हथियारों से लैस अपराधियों से मुकाबला, इनका हर कदम सेकंडों में तय होता है, और एक गलती जानलेवा हो सकती है।
SWAT कमांडो बनना सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक तपस्या है। यह शरीर की ताकत से ज्यादा दिमाग की स्थिरता और आत्मसंयम की मांग करता है। जो इस अग्निपरीक्षा को पार कर लेते हैं, वही उस एलीट फोर्स का हिस्सा बनते हैं, जो संकट की घड़ी में सबसे आगे खड़ी दिखाई देती है।
































