ब्रिटिश नागरिकता ले चुके मौलाना शमशुल हुदा के संतकबीरनगर और आजमगढ़ स्थित आवासों पर बुधवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की। लखनऊ से पहुंची ईडी की दो अलग-अलग टीमों ने दोनों जिलों में एक साथ कार्रवाई की। संतकबीरनगर में तीन अधिकारियों की टीम ने खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के मीट मंडी स्थित आवास पर दस्तक दी और घर में मौजूद परिजनों से पूछताछ शुरू की।
ईडी अधिकारियों ने घर पर मौजूद सदस्यों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए और डिजिटल डाटा की जांच शुरू कर दी। सूत्रों के मुताबिक, छापे के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए हैं, जिनमें संपत्ति, बैंक लेन-देन और विदेश से हुए कथित फंड ट्रांसफर से जुड़े कागजात शामिल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने मौलाना की पत्नी और बहू से भी लंबी पूछताछ की।
मौलाना शमशुल हुदा ने वर्ष 2017 तक आजमगढ़ में सहायक अध्यापक के रूप में नौकरी की थी। इस दौरान उन्होंने वहां भी मकान बनवाया था। ईडी की टीम ने आजमगढ़ स्थित आवास पर भी समानांतर कार्रवाई करते हुए स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई। पड़ोसियों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की गई।
जानकारी के अनुसार, मौलाना वर्ष 2007 से लंदन में रह रहा है और वर्ष 2013 में उसने ब्रिटेन की नागरिकता हासिल कर ली थी। भारतीय मूल के होते हुए विदेशी नागरिकता लेने और इसके बाद कथित तौर पर विदेशी फंडिंग के जरिए आर्थिक गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोपों की जांच पहले से चल रही थी।
मौलाना शमशुल हुदा के खिलाफ विदेशी फंडिंग और कथित पाकिस्तान कनेक्शन की जांच उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) पहले से कर रही है। सूत्रों का दावा है कि कुछ संदिग्ध लेन-देन और विदेशी खातों से जुड़े इनपुट मिलने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की है। बताया जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज कर वित्तीय लेन-देन की परतें खंगाल रहा है।
ईडी की छापेमारी देर शाम तक जारी रही। जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर मौलाना को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। फिलहाल, एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि विदेश से आए फंड का उपयोग किन गतिविधियों में किया गया और क्या उसमें किसी प्रतिबंधित संगठन या संदिग्ध नेटवर्क की भूमिका रही है।















