‘संदीप सिंह मर्डर केस’: STF ने ऐसे खोला खूनी साजिश का राज!

नवाबों के शहर लखनऊ का हाई-प्रोफाइल संदीप सिंह हत्याकांड… जिसने भी सुना, दहल उठा। 27 मई की वो दोपहर जब गोलियों की तड़तड़ाहट से पीजीआई इलाका गूंज उठा था, पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका था। लेकिन महज़ 5 दिनों के भीतर यूपी एसटीएफ (STF) और पीजीआई थाना पुलिस ने इस सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री का ऐसा पर्दाफाश किया है, जिसकी कहानी किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है।

प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह की दिनदहाड़े हुई मौत के पीछे कोई आम रंजिश नहीं, बल्कि 5 लाख रुपये की सुपारी और जमीन की भूख का वो खूनी खेल था, जिसे बहुत ही शातिर तरीके से बुना गया था। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

4 लग्जरी गाड़ियां, मर्सिडीज-फॉर्च्यूनर और ‘क्राइम का नेटवर्क’

पुलिस ने जब इस मामले के मास्टरमाइंड दिनेश यादव के साम्राज्य पर हाथ डाला, तो अधिकारियों की आंखें भी फटी रह गईं। जांच टीम ने दिनेश यादव के पास से चार चमचमाती लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • मर्सिडीज (Mercedes)
  • फॉर्च्यूनर (Fortuner)
  • टाटा सफारी (Tata Safari)
  • रेनॉल्ट किगर (Renault Kiger)

इसके साथ ही भारी मात्रा में कैश, मोबाइल फोन और फर्जी नंबर प्लेट्स बरामद हुई हैं। पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि दिनेश यादव कोई सीधा-साधा बिजनेसमैन नहीं, बल्कि उस पर जालसाजी, धोखाधड़ी और धमकी देने के कई गंभीर मुकदमे पहले से दर्ज हैं। इसी आपराधिक नेटवर्क का इस्तेमाल संदीप को रास्ते से हटाने के लिए किया गया।

जमीन का वो विवाद… जो बन गया ‘डेथ वारंट’

आखिर संदीप सिंह को क्यों मारा गया? पुलिस की तफ्तीश में जो सामने आया, वो चौंकाने वाला था। संदीप सिंह और दिनेश यादव के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर अदालती जंग और विवाद चल रहा था। लगातार हो रही मुकदमों और शिकायतों से दिनेश बुरी तरह झुझला चुका था। इसी हताशा में उसने अपने वफादार ड्राइवर मुकर्रबीन उर्फ मुबीन के साथ मिलकर संदीप की मौत का ‘डेथ वारंट’ तैयार कर डाला।

5 लाख में सौदा और ड्राइवर बना ‘मास्टर-कंट्रोलर’ पूछताछ में ड्राइवर मुबीन ने कुबूल किया कि उसी ने शूटरों को हायर किया था। 5 लाख रुपये में संदीप की मौत का सौदा तय हुआ। शूटरों के रुकने, खाने-पीने से लेकर वारदात के बाद उन्हें सुरक्षित भगाने का पूरा जिम्मा मुबीन के कंधों पर था।

सेकंड हैंड अपाचे, फर्जी नंबर और रेकी का खेल

कातिल अपनी पहचान को लेकर बेहद सतर्क थे। साजिश के तहत दिनेश यादव ने पैसे देकर मुबीन से एक सेकंड हैंड अपाचे बाइक खरीदी। इसके बाद उस बाइक की असली नंबर प्लेट हटाकर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई। इसी फर्जी नंबर वाली बाइक से कई दिनों तक संदीप सिंह की पल-पल की रेकी की गई, और आखिरकार 27 मई को इसी बाइक पर सवार होकर आए शूटरों ने संदीप को गोलियों से भून डाला।

‘परफेक्ट मर्डर’ का प्लान… और बकरीद का बहाना!

आरोपियों ने खुद को कानून की नजरों में बेगुनाह साबित करने के लिए ‘परफेक्ट एलीबाय’ (घटना के वक्त कहीं और होना) तैयार किया था। वारदात वाले दिन दोनों शहर से गायब हो गए। ड्राइवर मुबीन ने तो बाकायदा ‘बकरीद’ का बहाना बनाकर घर जाने की बात फैलाई, ताकि किसी को शक न हो। हत्या के तुरंत बाद शूटरों ने फोन कर दिनेश और मुबीन को ‘काम हो जाने’ की कन्फर्मेशन भी दी थी।

1 जून: जब STF के जाल में फंसे शिकारी

पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगातार इन पर नजर रखे हुए थीं। 1 जून 2026 को पुख्ता जानकारी मिलते ही संयुक्त टीम ने ताबड़तोड़ दबिश दी। मुबीन को डलौना अंडरपास के पास से दबोचा गया, जबकि मास्टरमाइंड दिनेश यादव को भी पुलिस ने उसके सुरक्षित ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया।

अभी खेल बाकी है… भले ही मास्टरमाइंड सलाखों के पीछे पहुंच गए हों, लेकिन संदीप सिंह पर ट्रिगर दबाने वाले शूटर अभी भी फरार हैं। पुलिस का कहना है कि बाकी आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही वो भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे। इस हत्याकांड ने एक बार फिर लखनऊ में प्रॉपर्टी विवाद के चलते पनप रहे संगठित अपराध के खौफनाक चेहरे को बेनकाब कर दिया है।

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