कानपुर में इंटरनेशनल फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़, सरगना जियाउल हसन गिरफ्तार

कानपुर में मार्कशीट गैंग के प्रिंटिंग प्रेस के कनेक्शन का बड़ा खुलासा पुलिस ने किया. इस खुलासे में मुख्य रूप से भूमिका डीसीपी अतुल श्रीवास्तव की रही जिन्होंने खुद एक परीक्षार्थी बनकर इस गैंग तक पहुंचे और अपनी डिग्री बनवाने की बात तय की. पैसे का लेनदेन तय किया और उसके बाद इस गैंग तक पहुंच गए. डीसीपी का कहना है कि इस गैंग के तार जहां तक है वहां वहां तक पुलिस जांच कर रही है. नया कनेक्शन कौशांबी का भी सामने आया है. इसके अलावा जिन-जिन देशों में इन डिग्री को लोगों ने लिया है, उनका भी वेरिफिकेशन किया जा रहा है.

डीसीपी के मुताबिक आने वाले समय में इसके भी खुलासे किए जाएंगे. इसमें सरगना जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ, उसका भाई हसन आसिफ, नूरुद्दीन और आमित अहमद हैं, जिन्हें जेल भेजा गया. इस गिरोह का संपर्क फरवरी में पकड़े गए गिरोह से होना भी पाया गया. जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ का जाल लंदन, ब्रिटेन, कनाडा, सऊदी, दुबई व भारत के कई राज्यों में फैला हुआ है. पुलिस की जांच में सामने आया कि लगभग 13 साल से गिरोह फर्जी मार्कशीट-डिग्री बनाने का कारोबार कर रहे हैं.

डीसीपी अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि काफी लंबे समय से फर्जी डिग्री बेचने की सूचना मिल रही थी. पुलिस कमिश्नर साहब भी इस गैंग के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे. इसके बाद एक मुखबिर से सूचना मिली कि जियाउल हसन के प्रिंटिंग प्रेस से फर्जी डिग्री छपती है. इसके बाद डीसीपी खुद अभ्यर्थी बनकर गए और इंजीनियरिंग की डिग्री की मांग की. जिस पर उनसे 30 हजार की मांग की गई. मोलभाव करने के बाद डील 17 हजार में तय हुई. इसके बाद पूरे सिंडिकेट का पता चला. इसका कौशांबी से भी कनेक्शन सामने आया है. अभी तक कि जांच में 13 साल में 60 हजार से अधिक फर्जी डिग्री बेचीं गई.

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