आज के समय में लोग डिजिटल होता जा रहा है। समय के अभाव में लोग फोन पर ही हवन, पूजन और यहां तक कि श्राद्ध पूजन भी कर लेते हैं। पहले के समय में जहां पाठ के लिए अलग-अलग पुस्तकें घर में हुआ करती थी, वहीं आज के समय में मोबाइल में चालीसा, पाठ, स्तोत्र चुटिकयों में खुल जाते हैं। आज के समय में डिजिटल ने भले ही जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन क्या मोबाइल पर पाठ करना उचित है, क्या ऐसा करने से फल प्राप्त होता है।
मोबाइल में चालीसा पढ़ना सही है या गलत?
आज के समय में लोगों का पूजाृपाठ करने का तरीका बिल्कुल बदल गया है। भक्ति का मूल आधार श्रद्धा, विश्वास और मन की एकाग्रता है. भगवान तक पहुंचने का महत्व माध्यम से ज्यादा भाव है।
कोई इंसान पूरे मन, सम्मान और ध्यान के साथ मोबाइल में देखकर पाठ करता है तो उसकी प्रार्थना का महत्व कम नहीं माना जाता है, क्योंकि बदलती जीवनशैली के कारण हर समय धार्मिक पुस्तक अपने साथ रखना सभी के लिए संभव नहीं होता है। ऐसे में ऑफिस, घर से दूर रहते हुए भी मोबाइल में देखकर पाठ करना सुविधाजनक है।
मोबाइल पर पाठ करना कंफर्ट है लेकिन मोबाइल पर पाठ करते समय नोटिफिकेशन, कॉल या अन्य ऐप्स ध्यान भटका सकते हैं। ऐसे में पूजा में मन नहीं लगता और ये एकाग्रता को कम करता है।
मोबाइल का इस्तेमाल सामान्य जीवन के हर काम में होता है और कई लोग उसे बाथरुम तक भी ले जाते हैं, ऐसे में उसी मोबाइल से पाठ करना धार्मिक नजरिए से ठीक नहीं माना जाता है, क्योंकि पारंपरिक पूजा-पाठ में स्वच्छता और पवित्र वातावरण को महत्व दिया गया है। हालांकि मन की पवित्रता, श्रद्धा और एकाग्रता पूजा में ज्यादा जरुरी है।
रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप मोबाइल देखकर पाठ करते हैं तो नोटिफिकेशन बंद कर दें।
फोन को एयरोप्लेन मोड पर डाल दें ताकि कॉल्स से आपका ध्यान न भटके।
जो चालीसा या स्त्रोत पढ़ते हैं उसकी फोटो या डॉक्यूमेंट डाउनलोड करके रख लें।
कई धार्मिक जानकार यह भी मानते हैं कि जहां संभव हो, धार्मिक ग्रंथ या पुस्तक से पाठ करना बेहतर माना जाता है। इसका एक कारण यह है कि पुस्तक के माध्यम से पाठ करते समय मन अपेक्षाकृत अधिक स्थिर रहता है और पूजा का वातावरण भी अधिक शांत महसूस होता है।