सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर हाल ही में एक दावा तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि “चीनी महिला SWAT(Special Weapons And Tactics) टीम ने भारतीय पुरुष SWAT (Special Weapons And Tactics) टीम को एक प्रतियोगिता में हरा दिया।” अब इस दावे को लेकर एक ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कोई सामान्य वायरल पोस्ट नहीं था, बल्कि भारत के सुरक्षा बलों की छवि को प्रभावित करने के लिए चलाया गया एक “संगठित और योजनाबद्ध डिजिटल अभियान” हो सकता है। यह दावा सबसे पहले “BRICS News” नाम के एक X हैंडल से पोस्ट किया गया था, जिसे विश्लेषण में चीन से जुड़ा बताया गया है। बाद में यह पोस्ट हटा दिया गया।
इसके बाद, लगभग एक जैसी भाषा और अंदाज में यह दावा कई अलग-अलग अकाउंट्स से एक ही समय के आसपास शेयर किया गया। रिपोर्ट का कहना है कि इस तरह की एकरूपता और टाइमिंग से यह संदेह मजबूत होता है कि यह “समन्वित तरीके से फैलाया गया” कंटेंट था।
रिपोर्ट में 25 से ज्यादा X अकाउंट्स का जिक्र किया गया है और उन्हें अलग-अलग भूमिकाओं में बांटा गया है:
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कुछ अकाउंट्स ने बिना किसी आधिकारिक स्रोत के इस दावे को तथ्य की तरह पेश किया।
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कई बड़े “ब्रेकिंग न्यूज” और “वार अपडेट” वाले एग्रीगेटर अकाउंट्स ने इसे तेजी से शेयर किया, जिससे यह वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा।
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कुछ भारतीय राजनीतिक विचारधारा से जुड़े अकाउंट्स ने इसे घरेलू राजनीति से जोड़कर शेयर किया।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ ऐसे अकाउंट्स, जो पहले से भारतीय संस्थाओं की आलोचना करते रहे हैं, उन्होंने इस दावे को और आगे बढ़ाया।
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एक ओवरसीज कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारी के अकाउंट द्वारा भी इस दावे को शेयर किए जाने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट इसे “सूचना को राजनीतिक वैधता मिलने” की प्रक्रिया बताती है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अकाउंट्स की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे दावे में खास तौर पर “चीनी महिला बनाम भारतीय पुरुष” का तुलना वाला एंगल उभारा गया। इसका उद्देश्य ज्यादा भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक असर पैदा करना बताया गया है। विश्लेषण में कहा गया है कि प्रतियोगिता के नियम, आधिकारिक नतीजे या किसी विश्वसनीय स्रोत का जिक्र नहीं किया गया, जिससे इस दावे की सच्चाई की जांच करना मुश्किल हो गया।
रिपोर्ट में कुछ चीनी पीआर और डिजिटल इन्फ्लुएंस कंपनियों का नाम भी लिया गया है, जिन पर पहले भी वैश्विक स्तर पर नैरेटिव मैनेजमेंट के आरोप लग चुके हैं। हालांकि, इस मामले में सीधे सबूत नहीं, बल्कि “प्रारंभिक संकेतों” के आधार पर आशंका जताई गई है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह मामला केवल एक वायरल पोस्ट का नहीं, बल्कि डिजिटल स्पेस में चल रहे “सूचना युद्ध” (Information Warfare) का उदाहरण हो सकता है।
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरोप ओपन-सोर्स विश्लेषण पर आधारित हैं और अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच या स्वतंत्र सत्यापन जरूरी होगा।

































