महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा खेला हुआ है. शिवसेना उद्धव गुट को तगड़ा झटका लगा है. शिवसेना यूबीटी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है. सूत्रों ने इस बारे में अहम जानकारी दी है. इन सभी सांसदों ने बुधवार को दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से पहले मुलाकात की और फिर शिवसेना में विलय की घोषणा की. उद्धव ठाकरे की शिवसेना में यह दूसरी बार टूट हुई है. इससे पहले 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी दोफाड़ हो गई थी. फिर चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के गुट को भी मूल शिवसेना का दर्जा मिल गया. फिर उद्धव ठाकरे ने अपने गुट का नाम शिवसेना यूबीटी रख लिया.
शिवसेना यूबीटी के महाराष्ट्र विधानसभा में 20 विधायक हैं. ऐसी रिपोर्ट है कि इसमें से 16 विधायक भी एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम सकते हैं. इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसदों ने भी पार्टी तोड़कर एनसीपीआई का दामन थाम लिया था. एनसीपीआई एनडीए की एक बेहद छोटी पार्टी है. ऐसे में देश की राजनीति ने नजरिए से यह बड़ी घटना है. शिवसेना यूबीटी में टूट का सीधा फायदा केंद्र में सत्ताधारी एनडीए को मिलने वाला है. इससे एनडीए का संख्या बल और बढ़ जाएगा. माना जा रहा है कि केंद्र सरकार लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के जुगाड़ में लगी है ताकि आने वाले दिनों में वह कुछ अहम संविधान संशोधन विधेयकों को पास करवा सके. शिवसेना उद्धव गुट के सांसदों के शिवसेना में शामिल होने के बाद लोकसभा में एनडीए का कुनबा 320 के करीब पहुंच गया है.
इससे पहले शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने मुंबई में एक प्रेस कांफ्रेंस में एक बागवत पर उतारू सांसदों को खुली धमकी दी. उन्होंने कहा कि इन सांसदों को पार्टी ने टिकट दिया और कार्यकर्ताओं ने अपनी खून से जीत दिलाई. ये धोखेबाज हैं. उन्होंने इन सांसदों के लिए कैमरे के सामने ही अपशब्द तक कह दिया. उन्होंने कहा कि इन नेताओं को पहले इस्तीफा देना चाहिए फिर किसी दूसरे दल में शामिल होकर चुनाव लड़ना चाहिए.

