Explainer: TMC में बड़ी बगावत, टॉलीवुड ब्रिगेड खामोश

पश्चिम बंगाल की सियासत में इस वक्त भूचाल आया हुआ है। लगातार 15 साल तक राज्य की सत्ता पर एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) आज अपने इतिहास के सबसे गंभीर दौर से गुजर रही है। 1998 में वजूद में आई टीएमसी आज अपनी स्थापना के बाद से सबसे बड़े ‘अस्तित्व के संकट’ का सामना कर रही है। विधानसभा चुनाव में बीजेपी (BJP) के हाथों मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती दिख रही है।

अंदरूनी कलह, खुली बगावत और दिग्गजों की चुप्पी ने ममता बनर्जी की ‘फायरब्रांड’ राजनीति के सामने कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए इस पूरे सियासी ड्रामे और संकट को एक्सप्लेनर के जरिए आसान भाषा में समझते हैं।

1. क्या है टीएमसी का मौजूदा संकट?

बीजेपी से विधानसभा चुनाव हारने के बाद टीएमसी को अपनी पहली सबसे बड़ी खुली बगावत का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि पार्टी के नेता अब दोफाड़ हो चुके हैं:

  • बागी गुट: पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 58 विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर खुद को “असली” तृणमूल घोषित कर दिया है।
  • ममता गुट: कुछ वफादार नेता अभी भी ममता बनर्जी के साथ डटे हुए हैं और धरने पर बैठ रहे हैं।
  • मौन गुट: पार्टी का एक बहुत बड़ा धड़ा, विशेषकर ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’, पूरी तरह खामोश है या फिर अपनी अगली राजनीतिक चाल सोच रहा है।

2. ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’ की रहस्यमयी खामोशी: जिस चमक ने जिताया, वो अब लापता क्यों?

ममता बनर्जी की राजनीति की एक बड़ी यूएसपी (USP) रही है- ग्लैमर और पॉलिटिक्स का कॉम्बिनेशन। साल 2001 में ममता ने तत्कालीन सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य के खिलाफ अभिनेत्री माधबी मुखर्जी को उतारा था। इसके बाद से शताब्दी रॉय, तापस पॉल, देव (दीपक अधिकारी), मिमी चक्रवर्ती, नुसरत जहां और सयानी घोष जैसे सितारों को उन्होंने सांसद-विधायक बनाया।

लेकिन 4 मई को मिली चुनावी हार के बाद से यह ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’ अजीब तरह से खामोश है:

  • सयानी घोष: टीएमसी की सबसे मुखर रहने वाली सांसद सयानी घोष नतीजों के बाद कालीघाट की बैठक में तो दिखीं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से ममता के किसी धरने या बैठक में नजर नहीं आई हैं।
  • देव (दीपक अधिकारी): जहां ममता बनर्जी चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगा रही थीं, वहीं सुपरस्टार देव ने 6 मई को सोशल मीडिया पर बीजेपी को उसकी जीत की बधाई दे दी।
  • परमब्रत चटर्जी: चुनाव में टीएमसी के लिए जमकर प्रचार करने वाले अभिनेता-निर्देशक परमब्रत ने भी इस पूरे बगावती संकट पर चुप्पी साध रखी है।

सियासी गलियारों में चर्चा: जो सितारे ममता बनर्जी के दम पर राजनीति के शिखर पर पहुंचे, वे अब या तो दूरी बना रहे हैं या फिर अपनी वफादारी बदलने की फिराक में हैं।

3. कौन खड़ा है ‘दीदी’ के साथ और किसने फेर ली नजर?

इस संकट की घड़ी में टीएमसी के दिग्गज नेताओं के रुख बंटे हुए हैं। आइए देखते हैं कि कौन किस पाले में खड़ा नजर आ रहा है:

ममता बनर्जी के वफादार (जो संकट में साथ हैं):

  • कल्याण बनर्जी: वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी कानूनी मोर्चे पर डटे हैं और बागी गुट की वैधता को कोर्ट में चुनौती देने की बात कर रहे हैं।
  • डेरेक ओ’ब्रायन: कालीघाट की बैठक से लेकर धरने के मंच तक, डेरेक लगातार ममता के साथ साए की तरह दिख रहे हैं।
  • महुआ मोइत्रा: नतीजों के बाद सार्वजनिक रूप से कम दिखने वाली महुआ ने सोशल मीडिया पर ममता का खुलकर समर्थन किया और बागियों को नसीहत दी कि “वे खुद को असली तृणमूल नहीं कह सकते।”
  • बाबुल सुप्रियो: बीजेपी से टीएमसी में आए सिंगर-नेता बाबुल सुप्रियो ने फेसबुक पर दो लंबे पोस्ट लिखकर ममता का बचाव किया और कहा, “अच्छे समय में भले ही न हों, लेकिन बुरे समय में मैं दीदी के साथ खड़ा रहूंगा।”
  • चंद्रिमा भट्टाचार्य और डोला सेन: हार के बावजूद ये दोनों महिला नेता ममता के हर धरने और कार्यक्रम में उनके ठीक बगल में बैठी नजर आ रही हैं।
  • नैना बनर्जी: चौरंगी से विधायक नैना बनर्जी ममता के साथ हैं, हालांकि उनके पति और वरिष्ठ नेता सुदीप बनर्जी ने अभी तक इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।

बागी और नाराज गुट (जो छोड़ रहे हैं साथ):

  • ऋतब्रत बनर्जी (पूर्व सांसद): सीपीआई(एम) से टीएमसी में आए ऋतब्रत अब 58 विधायकों के साथ ममता-अभिषेक के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर अब ‘नेता प्रतिपक्ष’ बनने की होड़ में हैं।
  • काकोली घोष दस्तीदार: बारासात की इस कद्दावर महिला सांसद ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है और बीजेपी नेता व सीएम शुभेंदु अधिकारी की बुलाई बैठक में भी शामिल हुईं।
  • मनोज तिवारी: क्रिकेटर से नेता बने मनोज तिवारी ने चुनाव हारने के ठीक अगले दिन (5 मई) ही टीएमसी छोड़ दी और निवर्तमान खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर तीखा हमला बोला।
  • ब्रत्या बसु: पूर्व शिक्षा मंत्री और पार्टी का मीडिया चेहरा रहे ब्रत्या बसु हार के बाद से अचानक गायब हैं। वे न तो मीडिया में आ रहे हैं और न ही उनका रुख साफ है।

आगे क्या? टीएमसी के सामने चुनौतियां

15 साल तक सत्ता की मलाई चाटने वाले कई नेताओं के लिए विपक्ष में बैठना और वह भी एक मजबूत बीजेपी के सामने, बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह हार नहीं मानेंगी और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी, लेकिन उनकी असली परीक्षा अपनी पार्टी को टूटने से बचाने की है। ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में शुरू हुई यह बगावत क्या टीएमसी को पूरी तरह खत्म कर देगी? और क्या आने वाले दिनों में टॉलीवुड के चमकते चेहरे ममता का हाथ छोड़ नई सियासी मंजिल की तलाश करेंगे? इसका जवाब आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे।

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