पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले में सीतलकुची ब्लॉक के देबनाथपाड़ा इलाके में एक पुल के गिरने की घटना ने एक बार फिर राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना शुक्रवार की सुबह हुई, जब एक रेत से लदा डंपर पुल पर से गुजर रहा था। पुल अचानक ढह गया, जिससे डंपर पुल पर ही फंस गया, लेकिन गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। डंपर चालक को सुरक्षित बाहर निकाला गया और प्राथमिक उपचार दिया गया।
यह पुल बारोमाशिया देबनाथपाड़ा स्थित है, जो देबनाथपाड़ा न्यू मार्केट को बारोमाशिया से जोड़ता है और एक नदी पर बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पुल 25-30 साल पुराना है और लंबे समय से खराब हालत में था। पुल के गिरने का वीडियो न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर शेयर किया है, जिसमें भयावह दृश्य दिखाई दे रहे हैं—पुल का हिस्सा टूटकर गिरता हुआ और उसके ऊपर से कुछ लोग सावधानी से पार होते नजर आ रहे हैं। वीडियो में पुल के ढहने की तेज आवाज और धूल-मिट्टी का गुबार साफ दिख रहा है, जो घटना की गंभीरता को दर्शाता है।
सीतलकुची से बीजेपी विधायक बरेन चंद्र बर्मन ने इस घटना पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीने से 1 साल के अंदर भारी डंपरों के आवागमन से 3-4 पुल अचानक ढह चुके हैं। विधायक ने आरोप लगाया कि इस पुल की हालत पहले से ही बेहद खराब थी, लेकिन न तो स्थानीय प्रशासन और न ही टीएमसी सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम उठाया। उन्होंने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार “कट मनी” कल्चर में फंसी रही और पुलों की मरम्मत या रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया।
बीजेपी ने इस घटना को ममता बनर्जी सरकार के शासनकाल में इंफ्रास्ट्रक्चर की लगातार विफलता का उदाहरण बताते हुए कई पुरानी घटनाओं का जिक्र किया, जैसे माजेहरहाट ब्रिज, विवेकानंद फ्लाईओवर आदि। पार्टी ने दावा किया कि राज्य में पुल अब “हाईवे टू हेल” बन गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर घटनास्थल पर वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय निवासियों ने पुल की खराब स्थिति और ओवरलोडेड वाहनों के आवागमन पर पहले भी शिकायतें की थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।































