एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में मुंबई पुलिस ने दोतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। जहां एक ओर अदालत में \’मकोका\’ के तहत शिकंजा कसा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरनी शुरू हो गई है।
घटना की रात बाबा सिद्दीकी की सुरक्षा में तैनात कॉन्स्टेबल श्याम सोनावणे को मुंबई पुलिस ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया है। जांच में पाया गया कि हमले के वक्त सोनावणे ने निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। \’प्रोटेक्शन एंड सिक्योरिटी ब्रांच\’ की विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया था। संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर 2 मई को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
पुलिस की चार्जशीट ने इस हत्याकांड के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खौफनाक मंसूबों का पर्दाफाश किया है। चार्जशीट में लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। अभियोजन पक्ष (Prosecution) के अनुसार, यह हत्या किसी पुरानी रंजिश के बजाय \’क्राइम सिंडिकेट\’ का खौफ पैदा करने और मुंबई में अपना दबदबा बनाने के इरादे से की गई थी।
प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी मोर्चे पर भी आरोपियों की घेराबंदी तेज हो गई है। मुंबई की विशेष अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार 27 आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में आरोप तय कर दिए हैं।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या की धारा के साथ-साथ मकोका (MCOCA), शस्त्र अधिनियम और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत मामला चलेगा। कानूनी जानकारों के मुताबिक, चार्ज फ्रेम होना आपराधिक सुनवाई का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जिससे अब इस केस का ट्रायल स्पीडी मोड में चलेगा।
बीते साल 12 अक्टूबर की रात को बांद्रा स्थित बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर बाबा सिद्दीकी की तीन शूटरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी थी। दशहरे के दिन हुई इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था।