जबसे देश आजाद हुआ है, तब से हर साल बजट पेश किए जाने की परंपरा रही है। इस साल भी बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा जो कि रविवार का दिन है। उस दिन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में सुबह 11 बजट पेश करेंगी। आईये आपको बताते देश के कुछ ऐतिहासिक बजट के बारे में।
- लाइसेंस राज को ज्यादातर सेक्टरों से खत्म कर दिया। अब कोई भी भारतीय या विदेशी कंपनी आसानी से फैक्ट्री लगा सकती थी।
- आयात-निर्यात के रास्ते खोल दिए। टैक्स कम किए, ताकि दुनिया से सामान आ-जा सके।
- बड़े-बड़े सेक्टर—टेलीकॉम, बिजली, बैंकिंग, बीमा—सबमें निजी कंपनियों और विदेशी निवेश को बुलावा दे दिया।
ये था उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण का जन्म। जैसे किसी ने पुराने, तंग घर के सारे दरवाजे-खिड़कियां खोल दीं। हवा आई, रोशनी आई। पहले तो लोग डरे, लेकिन धीरे-धीरे कारखाने लगे, नौकरियां बढ़ीं, मोबाइल फोन आए, कंप्यूटर आए, विदेशी कंपनियां आईं। भारत की अर्थव्यवस्था ने नई उड़ान भरी। आज हम जिस भारत को देखते हैं—आईटी हब, कारों की बाढ़, शॉपिंग मॉल—उसकी नींव इसी 1991 के क्रांतिकारी बजट में पड़ी थी।
आईये आपको बताते हैं उन्होंने क्या-क्या किया?
- कंपनियों पर टैक्स कम किया, ताकि वे और तेज बढ़ें और नौकरियां दें।
- कस्टम ड्यूटी घटाई, सामान सस्ता हुआ।
- सबसे बड़ी घोषणा की—मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) लाने की। हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन का गारंटीड काम मिलेगा, न्यूनतम मजदूरी पर।
- आरटीआई (सूचना का अधिकार) कानून लाने की बात की, ताकि आम आदमी सरकार से पूछ सके—”हमारा पैसा कहां जा रहा है?”
मनरेगा से गांवों में लोग शहर पलायन करने की बजाय अपने घर-खेतों के पास ही काम करने लगे। हाथों में काम, जेब में पैसे, घर में चूल्हा जलने लगा। आरटीआई ने लोगों को अधिकार दिया—अब वे भ्रष्टाचार पर सवाल उठा सकते थे। ये बजट कॉरपोरेट और आम आदमी—दोनों को साथ लेकर चला। एक तरफ अर्थव्यवस्था को स्पीड दी, दूसरी तरफ गरीब की थाली में रोटी बढ़ाई।
- 1991 — जब मनमोहन सिंह ने बंद दरवाजे तोड़े और दुनिया को भारत में बुलाया। क्रांतिकारी बजट, जो देश को कंगाली से बचाकर नई राह पर ले गया।
- 2005 — जब चिदंबरम ने कहा, “अब विकास सिर्फ शहरों का नहीं, गांवों का भी होगा।” आम आदमी का बजट, जो विकास को inclusive बनाया।
दोनों बजट अलग-अलग दौर के थे, लेकिन दोनों ने भारत को मजबूत, आत्मविश्वासी और समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभाई। और आज हम उसी कहानी का हिस्सा हैं! देश के आम नागरिक को इस बार भी आम बजट से उम्मीद है। देखना होगा की आम आदमी की थाली में मोदी सरकार कितने व्यंजन डालती है।






























