अगर आप सोचते हैं कि सरकारी मीटिंग्स सिर्फ फाइल, चाय और गंभीर चर्चाओं तक सीमित होती हैं, तो ज़रा बागपत विकास भवन का यह नज़ारा देख लीजिए! यहाँ गुरुवार को फाइलों की गड़गड़ाहट के बीच अचानक कुछ ऐसा हुआ कि बड़े-बड़े अधिकारियों की बोलती बंद हो गई।
हुआ कुछ यूं कि विकास भवन में डीएम अस्मिता लाल किसानों के साथ गंभीर मीटिंग कर रही थीं। तभी अचानक बिना किसी ‘प्रोटोकॉल’ के डीएम साहिबा के खास दोस्त ‘मटरू’ की एंट्री हुई। मटरू कोई आम शख्स नहीं, बल्कि एक लंगूर है! मटरू ने ज़ोरदार छलांग मारी और सीधे डीएम की कुर्सी के पास जा धमका।
आमतौर पर साहब की कुर्सी पर बैठने की हिम्मत किसी की नहीं होती, लेकिन मटरू के लिए नियम अलग हैं। जैसे ही मटरू पास आया, डीएम अस्मिता लाल मुस्कुराते हुए अपनी कुर्सी से खड़ी हो गईं। उन्होंने बड़े प्यार से अपने इस ‘खास दोस्त’ को अपनी ही कुर्सी पर बिठा दिया और उसे दुलारने लगीं।
कुछ देर तक मीटिंग का माहौल पूरी तरह ‘एनिमल प्लेनेट’ जैसा हो गया। हालांकि, थोड़ी देर बाद मटरू को प्यार से समझा-बुझाकर अधिकारियों की मदद से मीटिंग रूम से बाहर भेजा गया, जिसके बाद काम-काज दोबारा शुरू हुआ।
यह कोई पहली बार नहीं है जब डीएम अस्मिता लाल का जानवरों के प्रति लगाव सुर्खियों में आया हो। उन्होंने कुत्तों के लिए एक शानदार शेल्टर होम बनवाया है। कलेक्ट्रेट परिसर में रहने वाले इस लंगूर (मटरू) की देखभाल वह खुद अपनी देखरेख में करवाती हैं। बागपत के गलियारों में अब बस यही चर्चा है कि भाई, दोस्ती हो तो डीएम और मटरू जैसी! जहाँ प्रोटोकॉल किनारे हो जाते हैं और सिर्फ प्यार बचता है।














