दिल्ली-एनसीआर में शनिवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली। तेज हवाओं और घने बादलों के कारण कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के दौरान हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। कई क्षेत्रों में धूल भरी हवाएं भी देखने को मिलीं। प्रशासन ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों में जाने से बचने की सलाह दी है। बारिश होने पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने की भी आशंका जताई गई है।
दिल्ली-एनसीआर में शनिवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली। तेज हवाओं और घने बादलों के कारण कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के दौरान हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। कई क्षेत्रों में धूल भरी हवाएं भी देखने को मिलीं। प्रशासन ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों में जाने से बचने की सलाह दी है।मौसम विभाग ने पहले ही धूल भरी आंधी, गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की थी। विभाग के अनुसार, 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश और तेज हवाओं के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में शनिवार शाम मौसम ने अचानक खतरनाक रूप ले लिया। चुरू, सीकर और बीकानेर जिलों में उठे विशाल रेतीले बवंडर ने देखते ही देखते पूरे क्षेत्र को धूल की मोटी चादर से ढक दिया। कई जगहों पर हालात ऐसे बन गए कि दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया और दृश्यता काफी कम हो गई।सबसे पहले चुरू क्षेत्र में उठा यह महाबवंडर तेज हवाओं के साथ आगे बढ़ता हुआ सीकर जिले में प्रवेश कर गया। फतेहपुर शेखावाटी, रामगढ़ शेखावाटी और आसपास के कई इलाकों में धूल के घने गुबार ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, जबकि खुले में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो-तीन दिनों से हल्की आंधियां चल रही थीं, लेकिन शनिवार को आया यह रेतीला बवंडर कहीं अधिक शक्तिशाली था। तेज हवाओं ने बड़ी मात्रा में रेत और धूल को आसमान में उछाल दिया, जिससे पूरे इलाके में धूल का साम्राज्य नजर आने लगा और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों के दौरान रेगिस्तानी इलाकों में इस तरह के धूल भरे बवंडर सामान्य रूप से बनते हैं। जिस प्रकार समुद्र में तेज हवाएं लहरों को ऊंचा उठाकर तूफान का रूप दे सकती हैं, उसी तरह रेगिस्तान में तेज गति से चलने वाली हवाएं ढीली रेत को ऊपर उठाकर विशाल बवंडर का निर्माण करती है।. कई बार ये बवंडर कई किलोमीटर तक फैले होते हैं और अपने रास्ते में आने वाले क्षेत्रों को पूरी तरह धूल से ढक देते हैं।