सुकेश चंद्रशेखर सहित 21 आरोपियों पर मकोका (MCOCA) तय

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने देश के सबसे चर्चित रंगदारी मामलों में से एक में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrasekhar), उसकी पत्नी लीना पॉलोज (Leena Paulose) सहित सभी 21 आरोपियों के खिलाफ 217 करोड़ रुपये की रंगदारी, धोखाधड़ी और संगठित अपराध के मामले में आरोप तय (Charges Framed) कर दिए हैं।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के लिए इसे एक बहुत बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।

मकोका (MCOCA) सहित इन गंभीर धाराओं में तय हुए आरोप

पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (मकोका) प्रशांत शर्मा ने 30 मई 2026 को दिए अपने आदेश में सभी 21 आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं:

  • IPC की धाराएं: 120-B (आपराधिक साजिश), 384/386/388 (रंगदारी/वसूली), 420 (धोखाधड़ी), 406/409 (अमानत में खयानत), 170, 186, 468 और 471।
  • IT एक्ट: धारा 66 (कंप्यूटर संबंधित अपराध)।
  • मकोका (MCOCA): धारा 3 और 4 (संगठित अपराध गिरोह चलाने के खिलाफ सख्त कानून)।

मुख्य बात: जेल के भीतर से चलाए जा रहे इस इतने बड़े और जटिल सिंडिकेट मामले में ‘मकोका’ के तहत आरोप तय होना यह दर्शाता है कि जांच एजेंसी ने अदालत के सामने बेहद पुख्ता सबूत पेश किए हैं।

जेल के अंदर से चल रहा था 217 करोड़ का रंगदारी रैकेट

यह पूरा मामला FIR No. 208/2021 (स्पेशल सेल) से जुड़ा है, जिसकी जांच बाद में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपी गई थी। सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने जेल के भीतर बैठकर ही तकनीकी हेरफेर के जरिए एक बड़ा संगठित अपराध सिंडिकेट चलाया और रसूखदार लोगों से करीब 217 करोड़ रुपये की जबरन वसूली (Extortion) की।

EOW की 4 साल की कड़ी मेहनत लाई रंग

EOW के अधिकारियों ने पिछले चार सालों में इस बेहद पेचीदा मामले की परतें खोलने के लिए दिन-रात एक किया। इस हाई-प्रोफाइल जांच के दौरान पुलिस ने कई अहम सबूत जुटाए:

  • हवाला और वित्तीय लेन-देन: पैसों के लेन-देन (Hawala Trails) की गहन जांच की गई।
  • डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत: वॉयस रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन बरामद किए गए।
  • मकोका के तहत बयान: गवाहों के बयानों के साथ-साथ मकोका के तहत दर्ज इकबालिया बयान।
  • लक्जरी गाड़ियां जब्त: अपराध की कमाई से खरीदी गई आलीशान गाड़ियां और अन्य संपत्तियां कुर्क की गईं।

इन अधिकारियों की सूझबूझ से कसी गई कानूनी नकेल

अदालत में इस मामले को मजबूती से रखने के लिए EOW की एक विशेष ‘पैरवी टीम’ का गठन किया गया था। आईओ/एसीपी वीरेंद्र कादियान और इंस्पेक्टर प्रदीप राय की टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में पटियाला हाउस कोर्ट से लेकर दिल्ली हाई कोर्ट तक इस मामले की पैरवी की। वहीं, अदालत में राज्य (दिल्ली पुलिस) का पक्ष विशेष लोक अभियोजक (Special PP) अखंड प्रताप सिंह ने रखा। इस टीम ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया और आरोपों पर लंबी बहस के बाद इसे अंजाम तक पहुंचाया।

दिल्ली पुलिस का कड़ा संदेश

इस ऐतिहासिक कदम के बाद आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने संगठित वित्तीय अपराधों और जबरन वसूली के रैकेट के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि अपराध करने वाला चाहे कितना भी रसूखदार और साधन संपन्न क्यों न हो, और वह चाहे जेल के भीतर से ही काम क्यों न कर रहा हो, कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता।

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