2027 के चुनाव में अखिलेश और ओवैसी क्या साथ आएंगे?

उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसके लिए अभी से राज्य में अपना अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में गठबंधन के लिए सपा और बसपा का नाम लिए बिना खुला ऑफर दिया है।

ओवैसी के मुताबिक उनकी पार्टी अपने दम पर भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘हम तो अपना चुनाव पूरी ताकत के साथ, तैयारी के साथ लड़ रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी के लोग बड़ी मेहनत कर रहे हैं और हमारी कोशिशें जारी हैं।’

हालांकि, जब हैदराबाद के सांसद से यह पूछा गया कि यूपी के बारे में माना जाता है कि यहां ज्यादातर मुस्लिम वोटर समाजवादी पार्टी को समर्थन करते हैं, तो उन्होंने यह कहकर इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि वो दिन अब गुजर चुके हैं-

कोई किसी के साथ नहीं है, गए वो दिन…एमआईएम पार्टी बड़ी स्ट्रॉन्ग होकर निकली है और उन्हें बहुत जल्द अंदाजा लग जाएगा, जो इस तरह की बकवास कर रहे हैं

उन्होंने गठबंधन के मुद्दे पर यूपी की एक सभा में भी साफ किया कि ‘बीजेपी को रोकने के लिए अगर कोई साथ आना चाहता है तो हम तैयार हैं। लेकिन, यह अलायंस सम्मान और बराबरी पर आधारित हो। हम सिर्फ दूसरों के लिए दरी बिछाने जैसा बर्ताव स्वीकार नहीं करेंगे। चर्चा निश्चित तौर पर राजनीतिक भागीदारी और सत्ता के उचित शेयर पर आधारित हो।’

असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी राजनीति में मुस्लिम वोटों की भूमिका को लेकर नई रणनीतियां बन रही हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिला था, जिसका सीधा फायदा सीटों में दिखाई दिया। अब सवाल यह है कि क्या सपा उस वोट बैंक में AIMIM को हिस्सेदार बनाना चाहेगी? हालांकि, AIMIM का यूपी विधानसभा रिकॉर्ड अभी तक कमजोर रहा है। 2017 में 38 सीटों पर लड़कर 37 पर जमानत जब्त हुई. 2022 में करीब 100 सीटों पर लड़ने के बावजूद वोट शेयर महज 0.43% रहा. लेकिन, स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया।

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