आज जब पूरा देश ‘नारी शक्ति’ को सलाम कर रहा है, उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने महिला सशक्तिकरण को नई ऊँचाई दी है। एक ऐसी मेट्रो ट्रेन, जिसका नाम है शक्ति मेट्रो – जो सिर्फ स्टील और इंजन की नहीं, बल्कि हिम्मत, संघर्ष और सफलता की जीती-जागती मिसाल है।
UPMRC के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मेट्रो स्टेशन से इस विशेष ‘एक्जीबिशन ऑन व्हील्स’ को हरी झंडी दिखाई। ट्रेन कानपुर मेट्रो में रवाना हुई, लेकिन इसके साथ-साथ समाज में महिलाओं की उपलब्धियों की कहानियाँ भी हर स्टेशन, हर कोच तक पहुँच रही हैं।
दीवारों पर सजी हैं उन महिलाओं की तस्वीरें और कहानियाँ जो चुपचाप नहीं, बल्कि जोर-शोर से इतिहास रच रही हैं – वैज्ञानिक, डॉक्टर, उद्यमी, शिक्षिका, पुलिस अधिकारी, खिलाड़ी और अनगिनत नाम जिन्होंने हर चुनौती को पार कर दिखाया। यह प्रदर्शनी पूरे एक सप्ताह तक चल चलेगी, ताकि हर यात्री – चाहे वो छात्र हो, कर्मचारी हो या गृहिणी – महिलाओं के योगदान को महसूस कर सके और उन्हें सच्चा सम्मान देना सीखे।
UPMRC के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने गर्व से कहा, “आज मेट्रो का संचालन सिर्फ पुरुषों का क्षेत्र नहीं रहा। यूपी मेट्रो में महिलाएँ अब बैकएंड से फ्रंटलाइन पर आ चुकी हैं। ट्रेन ऑपरेशन, मेंटेनेंस, सिग्नलिंग, इलेक्ट्रिकल – हर कठिन विभाग में वे बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। गर्व की बात है कि प्रदेश की हर तीन में से एक मेट्रो ट्रेन अब महिला ऑपरेटर के हाथों में दौड़ रही है।”यह आंकड़ा कोई मामूली नहीं – यह उस बदलाव का प्रतीक है जहाँ पुरानी सोच टूट रही है और नई पीढ़ी देख रही है कि महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
UPMRC का संकल्प सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित, आरामदायक और सशक्त परिवहन बनाना है। मेट्रो स्टेशनों और कोचों में लगे CCTV, महिला सुरक्षा कमेटी, इमरजेंसी बटन, अच्छी लाइटिंग और महिला स्टाफ की मौजूदगी – हर छोटा-बड़ा इंतजाम इसी मकसद से किया गया है कि कोई भी महिला बेझिझक, बिना डर के सफर कर सके।
शक्ति मेट्रो सिर्फ एक ट्रेन नहीं है – यह एक संदेश है जब महिलाएँ आगे बढ़ती हैं, तो पूरा समाज आगे बढ़ता है। जब ट्रेन की रफ्तार महिलाओं की हिम्मत से तय होती है, तो मंजिल सिर्फ स्टेशन नहीं – एक समान और मजबूत समाज होता है। इस महिला दिवस पर UPMRC की यह पहल हमें याद दिलाती है – सशक्तिकरण की असली ताकत तब आती है, जब हम सिर्फ बातें नहीं करते, बल्कि कदम उठाते हैं। शक्ति मेट्रो की यह यात्रा जारी रहेगी – पटरियों पर और समाज के दिल में।
















