दिल्ली के साकेत में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे के बाद भी नगर निगम (MCD) और प्रशासन की नींद पूरी तरह नहीं खुली है। साकेत हादसे से सबक लेने के बजाय एमसीडी पर अब भ्रष्टाचार, पक्षपात और रसूखदारों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
हादसे के बाद दिखावे के लिए दिल्ली के छतरपुर समेत कई इलाकों में सीलिंग और बुलडोजर की कार्रवाई तो शुरू की गई है, लेकिन जमीन पर इस कार्रवाई की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
रसूखदारों के अवैध निर्माणों पर ‘रहस्यमयी’ चुप्पी
छतरपुर के स्थानीय लोगों ने ‘जनतंत्र टीवी’ से बातचीत में प्रशासन और एमसीडी की नीयत पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय निवासियों का साफ कहना है कि एमसीडी की यह कार्रवाई पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और दोहरी नीति पर आधारित है।
बड़ा सवाल: एक तरफ आम लोगों और छोटे निर्माणों पर तुरंत बुलडोजर चला दिया गया, तो दूसरी तरफ इलाके के कुछ बड़े रसूखदारों और रसूख वाले भू-माफियाओं के अवैध अतिक्रमणों पर एमसीडी ने अपनी आंखें मूंद रखी हैं। आखिर किस ‘लेन-देन’ या राजनीतिक दबाव के चलते इन संपत्तियों को छुआ तक नहीं जा रहा है?
इस पूरे मामले पर अब सियासत भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता ब्रह्म सिंह तंवर ने एमसीडी और स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगाए हैं।
तंवर ने कहा:
- दिखावे की कार्रवाई: दिल्ली में लगातार हो रहे हादसों के बाद प्रशासन सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने के लिए दिखावे की कार्रवाई कर रहा है।
- चेहरा देखकर एक्शन: जमीन पर लोगों के नाम और चेहरे देखकर सीलिंग और बुलडोजर की कार्रवाई तय की जा रही है। जो रसूखदार हैं या जिनकी ‘सेटिंग’ है, उन्हें छोड़ दिया जा रहा है।
जनता का सवाल: लोगों की जान से ज्यादा कीमती है रसूखदारों का ‘वोट और नोट’?
साकेत हादसे ने साफ कर दिया है कि अवैध और कमजोर निर्माण दिल्लीवालों के लिए ‘मौत का कुआं’ साबित हो रहे हैं। ऐसे में छतरपुर से आ रही तस्वीरें बेहद डराने वाली हैं। स्थानीय जनता पूछ रही है कि क्या प्रशासन के लिए दिल्ली की जनता की जान की कोई कीमत नहीं है? आखिर किस डर या मजबूत साठगांठ की वजह से एमसीडी भ्रष्ट तंत्र के सामने घुटने टेके हुए है?
अगर समय रहते इन रसूखदारों के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो साकेत जैसा एक और बड़ा हादसा छतरपुर में भी देखने को मिल सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भ्रष्ट अधिकारियों और एमसीडी की होगी।