अहमदाबाद विमान हादसे के बाद कितने बदले सुरक्षा के नियम?

एक साल पहले आज ही के दिन अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान उड़ान भरने के 33 सेकंड बाद ही हादसे का शिकार हो गया था. इस हादसे में 241 यात्रियों और सभी क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी. इस विमान में सवार एकमात्र यात्री जिंदा बचा था, जिसे करिश्मा माना जाता है. आज सवाल है कि इस हादसे से हमने क्या सीखा और अपनी हवाई यात्राओं को पहले से अब तक कितना सुरक्षित बनाने के प्रयास किए हैं?

इस विमान हादसे ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था. बोइंग कंपनी के 787-8 ड्रीमलाइनर को दुनिया में सबसे सुरक्षित विमान माना जाता है. इससे पहले यह कभी किसी हादसे का शिकार नहीं हुआ था. हादसा तो दूर इस विमान के साथ किसी छोटी-मोटी अप्रिय घटना की रिपोर्ट नहीं हैं. फिर अचानक से इतना बड़ा हादसा लोगों के मन में डर पैदा कर रही था.

इस गंभीर हादसे के बाद भारत के नागरिक उड्यन महानिदेशालय (DGCA) ने तुरंत ही सीरियस स्तर पर सुरक्षा ऑडिट शुरू किया, जिसमें विमान कंपनियों द्वारा नागरिक सुरक्षा से जुड़ी कई खामियों की अनदेखी सामने आई. इस सेक्योरिटी ऑडिट के दौरान DGCA ने फ्लाइट ऑपरेशंस, एयरवर्थिनेस, रैंप सुरक्षा, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, संचार, नेविगेशन एवं निगरानी सिस्टम और टेक-ऑफ से पहले होने वाली मेडिकल जांच जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की. इस जांच में सामने आया कि सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माने जाने वाले इन पहलुओं की लगातार अनदेखी हो रही थी.

इस ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां देखने को मिली थीं, जैसे रनवे की जांच पाया गया कि कुछ रनवे पर सेंटर लाइन के निशान फीके पड़ हो चुके थे. वहीं, रैपिड एग्जिट टैक्सीवे पर लगी हरी लाइटें ठीक से फिक्स्ड नहीं थीं. इसके अलावा, हवाई अड्डों के आसपास हुए नए निर्माण के बावजूद अवरोध सीमा (ऑब्ट्रक्शन लिमिटेसशन) से संबंधित आंकड़े कई सालों से अपडेट तक नहीं थे.

इससे भी ज्यादा गंभीर और खतरनाक यह था कि कुछ एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) सुरक्षा संबंधी सावधानियों में लापरवाही बरत रहे थे. कई विमानों की तकनीकी खामियों को दूर करने की प्रक्रिया में वह शामिल नहीं थे, जबकि विमानों की तकनीकी गड़बड़ियों को भी रिकॉर्ड करने में वे लापरवाही बरत रहे थे. DGCA अब सख्त हो चुका था और उसने एक विमान को तब तक उड़ान की मंजूरी नहीं दी, जब तक उसने अपने घिस चुके टायरों को बदल नहीं लिया. DGCA ने 7 दिनों तक सभी विमान कंपनियों को सुरक्षा से जुड़े सभी पोटोकॉल सख्ती से पूरे करने का निर्देश दिया था.

इस बीच एयर इंडिया भी अपने सिक्योरिटी ऑडिट मैनेजमेंट को लेकर सख्त हो गया. एयर इंडिया ने DGCA के नियमों के अनुसार होने वाले सुरक्षा चेक को डबल चेक में बदल दिया. DGCA द्वारा तय गाइडलाइन्स के मुताबिक, एयरलाइन कंपनियों को ऑपरेशंस, मेंटेनेंस, ग्राउंड हैंडलिंग समेत तमाम विभागों का ऑडिट करना होता है. मुख्य बेस पर यह ऑडिट साल में एक बार, जबकि दूसरे हवाई अड्डों पर यह दो साल में एक बार जरूरी होता है.

एयर इंडिया ने अपने इंटरनल ऑडिट के तहत इसे दिल्ली में स्थित अपने मुख्य बेस पर इसे साल में बार और दूसरे हवाई अड्डों पर साल में एक बार जरूरी कर दिया. कंपनी ने पिछले साल इस दुर्घटना का सामना करने के बाद ही तुरंत सेफ्टी पॉज ले लिया था, ताकि DGCA की निगरानी में वह अपने वाइडबॉडी बोइंग 777 और बोइंग 787 विमानों का अतिरिक्त निरीक्षण किया जा सके. इससे कंपनी को विमान से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं की तसल्ली से जांच और विश्वसनीयता बढ़ाने का मौका मिला.

एयर इंडिया समेत विमान कंपनियों के तमाम दावों के बावजूद मार्च में जारी ससंदीय समिति ने DGCA के ऑडिट के आधार पर जो रिपोर्ट तैयार की है. उसमें विमान कंपनियों के ये दावे संतोषजनक नहीं माने जा सकते. जनवरी 2026 से फरवरी 2026 के दौरान हुए इस ऑडिट की रिपोर्ट बताती है कि देश में ऑपरेशनल 754 कमर्शियल फ्लाइट्स में से 377 फ्लाइट्स ऐसी हैं, जिनमें बार-बार तकनीकी गड़बड़ियां पाई गईं. सिर्फ एयरइंडिया की ही बात करें तो उसके 166 विमानों में से 137 में बार-बार तकनीकी गड़बड़ियां पाई गईं. द हिंदू के बिजनेस लाइन में छपी एक रिपोर्ट में इसका हवाला दिया गया है.

दुनिया को झकझोर देने वाले इस हादसे के बाद, पिछले महीने दिल्ली एयरपोर्ट की ओर आ रहे एक एयरबस A320 विमान के इंजन में आग लग गई थी. इससे पहले एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान ने मस्कट में टेक-ऑफ रोल के दौरान रनवे की किनारे वाली लाइटों को नुकसान पहुंचा दिया था.

एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट कैप्टन मोहन रंगनाथन ने कहा, ‘पिछले साल जून में हुए AI 171 हादसे के बावजूद एयर इंडिया के लिए सुरक्षा प्राथमिकता नहीं लगती. उम्मीद थी कि उनके टॉप लीडरशिप की ओर से ज्यादा जवाबदेही दिखाई जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.’ उन्होंने कहा, ‘अहमदाबाद विमान हादसे के बाद भी सुरक्षा से जुड़े कई मामले सामने आए हैं- जैसे कि वैध लाइसेंस के बिना पायलटों द्वारा उड़ान भरना. क्रू की थकान भी चिंता का विषय है. ऐसा लगता है कि एयरलाइन सुरक्षा की तुलना में अपने बिजनेस इंट्रेस्ट को ज्यादा महत्व दे रही है.’

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