मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामला उजागर किया है. महिला व बाल विकास विभाग (WCD) के ज्वॉइंट डायरेक्टर लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर हुई छापेमारी में करीब 11.76 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है. जांच के दौरान जब अधिकारियों ने संपत्ति के सोर्स के बारे में पूछताछ की, तो बताया गया कि फैमिली इनकम का एक बड़ा हिस्सा उनकी पत्नी की सिलाई-कढ़ाई के काम से आता है. इस दावे ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया.
न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकायुक्त पुलिस की तीन टीमों ने बुधवार (10 जून 2026) की सुबह इंदौर में WCD के ज्वॉइंट डायरेक्टर लक्ष्मी नारायण कंडवाल के घर, जिम और एक डिपार्टमेंटल स्टोर समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद की गई थी. शुरुआती जांच में जो संपत्तियां सामने आई हैं, वे उनकी ज्ञात आय से करीब 286 प्रतिशत अधिक बताई जा रही हैं.
छापेमारी में क्या-क्या निकला?
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आया कि कंडवाल और उनके परिवार के नाम पर कई अचल संपत्तियां हैं. इनमें मकान, जमीन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य निवेश शामिल हैं. लोकायुक्त अधिकारियों के मुताबिक, सिर्फ जमीन और मकानों की कीमत ही करोड़ों रुपये आंकी गई है.
इसके अलावा बैंक खातों, निवेश दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है. कई दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जिनकी पड़ताल अभी जारी है.
जांच अधिकारियों के मुताबिक, अफसर कंडवाल के पास 4 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग है. इसका एरिया 13500 स्क्वॉयर फीट है. इसमें पावर अप जिम नाम से जिम चलती है. इससे हर महीने 1.25 लाख रुपये का किराया आता है. इसी बिल्डिंग में बड़ा डिपार्टमेंटल स्टोर है. इसे दो बेटे संभालते हैं. इस स्टोर के सामान की वैल्यू करीब 35. 73 लाख रुपये आंकी गई है.
इसके अलावा कंडवाल के नाम पर पीथमपुर में 11 कीमती कृषि प्लॉट हैं. एक पॉश इलाके में रिहायशी प्लॉट भी है.
जांच अधिकारियों को उनके घर से 38.49 लाख रुपये की वैल्यू का सामान मिला है. 4.89 लाख रुपये के जेवर मिले हैं. बैंक के लॉकर में रखे सोने-चांदी के जेवर की कीमत 24.73 लाख रुपये आंकी गई है.
कुछ संपत्तियां पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज
लोकायुक्त की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संपत्तियां पत्नी, बेटे, बहू और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं. अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और फंडिंग की गहन जांच की जरूरत है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए पैसा कहां से आया? क्या इनकम के वैलिड सोर्स इन निवेशों को उचित ठहरा सकते हैं? लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि किसी भी इनकम सोर्स को तभी वैलिड माना जाएगा, जब उसके समर्थन में पर्याप्त रिकॉर्ड और कर संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हों.
क्या कहते हैं अधिकारी?
लोकायुक्त इंस्पेक्टर आशुतोष मिठास ने बताया कि उन्हें कंडवाल के खिलाफ शिकायत मिली थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति जमा की है. इस शिकायत के आधार पर छापा मारा गया. अभी फोरेंसिक जांच भी होनी है. इसके बाद पूरी संपत्ति का ब्योरा निकाला जाएगा.
फिलहाल लोकायुक्त की जांच जारी है. अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संपत्तियों का वास्तविक स्रोत क्या था. हालांकि, शुरुआती खुलासों ने सरकारी महकमों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है.