पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के विधायकों और सांसदों के पाला बदलने के सिलसिले के बीच, अब भ्रष्टाचार के आरोपों में नेताओं की गिरफ्तारियों ने टीएमसी को बैकफुट पर ला दिया है। इसी कड़ी में हावड़ा जिले के उदयनारायणपुर से टीएमसी के स्थानीय नेता ब्रह्मानंद चक्रवर्ती का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल होने से राज्य का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है।
साड़ियों के ढेर से निकले नेता जी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रह्मानंद चक्रवर्ती के खिलाफ भ्रष्टाचार, सरकारी योजनाओं में ‘कट-मनी’ (कमीशनखोरी) लेने और विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों में जांच चल रही थी। जांच एजेंसियों को इनपुट मिला था कि चक्रवर्ती अपने घर पर ही मौजूद हैं, जिसके बाद पुलिस टीम ने उनके आवास पर छापेमारी की।
पुलिस की कार्रवाई से घबराकर टीएमसी नेता ने गिरफ्तारी से बचने के लिए एक अजीब रास्ता चुना। उन्होंने घर के भीतर रखे कपड़ों और साड़ियों के एक बड़े ढेर के नीचे खुद को छुपा लिया। हालांकि, मुस्तैद पुलिस अधिकारियों ने जब घर के कोने-कोने की तलाशी ली, तो साड़ियों के बीच छिपे नेता जी धरे गए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, विपक्ष हमलावर
इस पूरी छापेमारी और गिरफ्तारी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने ममता सरकार और सत्तारूढ़ दल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि भ्रष्टाचार में डूबे टीएमसी नेता कानूनी जवाबदेही से भागने के लिए इस कदर गिर चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि यह घटना साफ दर्शाती है कि जांच एजेंसियों के डर से नेता किस तरह छिपने के हथकंडे अपना रहे हैं।
‘कट-मनी’ पर फिर गरमाया बंगाल
यह मामला ऐसे समय में दोबारा चर्चा में आया है जब पश्चिम बंगाल में ‘कट-मनी’ और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं (विशेषकर आवास परियोजनाओं) में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। राज्य के कई हिस्सों से स्थानीय टीएमसी नेताओं के खिलाफ जनता के विरोध प्रदर्शन और कमीशनखोरी के खिलाफ गुस्से के वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि: “ब्रह्मानंद चक्रवर्ती का यह मामला बंगाल की राजनीति में भ्रष्टाचार, चुनावी हिंसा और राजनीतिक जवाबदेही के मुद्दों को फिर से मुख्यधारा में ले आया है। आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह वीडियो विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का एक बड़ा हथियार बन गया है।”