सिपाही भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने वालों को मिलेगी ‘उम्रकैद’

मुख्य बातें :

AI की तीसरी आंख का पहरा: प्रदेश के 1,183 केंद्रों पर 30,000+ CCTV कैमरों को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया है; गड़बड़ी होते ही सीधे मुख्य कंट्रोल रूम में गूंजेगा ‘वॉर्निंग अलार्म’।

उम्रकैद और करोड़ों का जुर्माना: नए कानून के तहत पेपर लीक माफिया या सॉल्वर गैंग के पकड़े जाने पर सीधे आजीवन कारावास और करोड़ों के जुर्माने का शिकंजा कसेगा; पहली गलती पर भी न्यूनतम 10 साल की जेल।

STF का ‘ऑपरेशन क्लीन’: यूपी एसटीएफ की खुफिया विंग पूरी तरह एक्टिव, सॉल्वर गैंग और संदिग्धों की पल-पल की लोकेशन और कुंडली खंगाल रही है पुलिस।

महापरीक्षा का चक्रव्यूह: आगामी 8, 9 और 10 जून को यूपी के सभी 75 जिलों में होगी परीक्षा, 32,679 पदों के लिए मैदान में उतरेंगे 28 लाख जांबाज अभ्यर्थी।

क्वेश्चन पेपर्स का ‘सीक्रेट रूट’: लीक प्रूफ सुरक्षा के लिए प्रश्नपत्रों को केवल राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officers) ही अपनी सरकारी गाड़ियों में बेहद गोपनीय रूट से सेंटर्स तक पहुंचाएंगे।

उत्तर प्रदेश में होने जा रही अब तक की सबसे ऐतिहासिक और विशाल सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर योगी सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसे भेद पाना किसी भी सॉल्वर गैंग या पेपर लीक माफिया के बस की बात नहीं होगी। आगामी 8, 9 और 10 जून को राज्य के सभी 75 जिलों में यह महापरीक्षा आयोजित होने जा रही है। 32,679 पदों की इस रेस में करीब 28 लाख अभ्यर्थी अपना भाग्य आजमाएंगे।

भर्ती बोर्ड के डीआईजी सत्यार्थ पंकज ने इस हाई-टेक सुरक्षा ऑपरेशन का खुलासा करते हुए साफ कर दिया है कि इस बार अपराधियों और जालसाजों के लिए जेल के दरवाजे चौड़े खुले हैं।

AI का ‘अलार्म’ और थ्री-ट्रायल कंट्रोल रूम

क्राइम के डिजिटल और टेक-सैवी विलेन से निपटने के लिए पुलिस ने भी अपनी ‘तीसरी आंख’ को सुपर-पावरफुल बना दिया है। डीआईजी सत्यार्थ पंकज के मुताबिक, परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए राज्य में एक ‘थ्री ट्रायल कंट्रोल रूम’ स्थापित किया गया है। पूरे सूबे के 1,183 परीक्षा केंद्रों पर 30,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए लाइव निगरानी रखी जाएगी।

इस बार गेम चेंजर साबित होगा AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सॉफ्टवेयर। अगर किसी भी सेंटर पर मिनट-टू-मिनट लाइव मॉनिटरिंग के दौरान कोई भी संदिग्ध हलचल, अजीब गतिविधि या नकल की कोशिश दिखती है, तो यह AI सॉफ्टवेयर इंसानी चूक का इंतजार किए बिना, सीधे भर्ती बोर्ड के मुख्य कंट्रोल रूम में ‘वॉर्निंग अलार्म’ बजा देगा। अलार्म बजते ही क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) मौके पर एक्शन लेगी।

नया कानून, कड़ा कड़ा प्रहार: सीधे आजीवन कारावास!

सॉल्वर गैंग और पेपर लीक करने वाले सिंडिकेट्स के लिए डीआईजी ने सीधी चेतावनी जारी की है। यूपी में लागू नए सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत इस बार कानून का ऐसा चाबुक चलेगा कि अपराधी दोबारा सिर नहीं उठा पाएंगे। परीक्षा में गड़बड़ी करने या फर्जी कैंडिडेट (सॉल्वर) बनकर बैठने पर करोड़ों रुपये का जुर्माना और आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक की सजा का प्रावधान है। यदि कोई अपराधी पहली बार भी इस तरह के संगीन जुर्म में शामिल पाया जाता है, तो उसे कम से कम 10 वर्ष की काल कोठरी काटनी होगी।

इतना ही नहीं, यूपी एसटीएफ (UP STF) के कमांडो और खुफिया विंग जमीन से लेकर आसमान (डिजिटल दुनिया) तक पूरी तरह एक्टिव हैं। संदिग्धों, पुराने नकल माफियाओं और कोचिंग संचालकों की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है।

प्रश्नपत्रों की ‘सीक्रेट’ सुरक्षा:

लीक की गुंजाइश को शून्य करने के लिए क्वेश्चन पेपर्स को लेकर बेहद गोपनीय और कड़ा रूट प्लान तैयार किया गया है। प्रश्नपत्रों को लाने और ले जाने की जिम्मेदारी किसी प्राइवेट वेंडर या आम कर्मचारी की नहीं होगी, बल्कि केवल राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officers) अपनी सरकारी गाड़ियों की सुरक्षा में इन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाएंगे।

कमांडो जैसी सुरक्षा से गुजरना होगा अभ्यर्थियों को (गाइडलाइंस)

परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने के लिए अभ्यर्थियों और स्टाफ के लिए बेहद कड़े प्रोटोकॉल तय किए गए हैं:

  • नो गैजेट, नो चीटिंग: अभ्यर्थियों को केंद्र के भीतर केवल अपना एडमिट कार्ड, ओरिजिनल पहचान पत्र और ब्लैक/ब्लू बॉल पेन लाने की इजाजत होगी। मोबाइल, गैजेट, कागज का टुकड़ा ले जाने पर सीधे कानूनी कार्रवाई होगी।
  • बायोमेट्रिक अभेद्य दीवार: परीक्षा केंद्र के मुख्य गेट पर हर एक अभ्यर्थी का कड़ा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और फेशियल रिकग्निशन किया जाएगा। इसमें पास होने के बाद ही एंट्री मिलेगी, जिससे सॉल्वर का बैठना नामुमकिन होगा।
  • स्टाफ पर भी नजर: केवल छात्र ही नहीं, बल्कि परीक्षा ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों और जांच अधिकारियों पर भी शिकंजा रहेगा। उनके लिए विशेष ‘एंट्री कार्ड’ और ‘ऑथराइज्ड कार्ड’ जारी किए गए हैं। बिना इसके किसी भी स्टाफ को अंदर जाने की इजाजत नहीं होगी।
  • सैनिटाइजेशन और सीलिंग: सुरक्षा और शुचिता को देखते हुए सभी परीक्षा केंद्रों को पहले पूरी तरह से सैनिटाइज (चेक और सुरक्षित) किया जाएगा, जिसके बाद ही प्रश्नपत्रों को खोला जाएगा और परीक्षा शुरू होगी।

योगी सरकार और यूपी पुलिस का यह हाई-टेक एक्शन प्लान साफ संदेश देता है: “मेहनत करने वालों को वर्दी मिलेगी, और जालसाजी करने वालों को जेल।”

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