मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद होने के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इलेक्शन पिटीशन हाईकोर्ट मे दाखिल कर सकते है। याचिका में कांग्रेस ने चुनाव अधिकारी (RO) द्वारा नामांकन पत्र खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
गौरतलब है कि मीनाक्षी नटराजन के मामले सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर उनके द्वारा दाखिल की जाने वाली इलेक्शन पेटिशन पर नहीं पड़ेगा। यानि कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका गुण दोष पर नहीं बल्कि मेंटेनेबिलिटी पर खारिज की है सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वो इस स्टेज पर हस्तक्षेप नहीं करेगा।
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग से शिकायत किए जाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय चुनाव आयोग को 10 जून की सुबह ही शिकायत की गई थी, लेकिन चुनाव की पूरी प्रक्रिया हो जाने के बाद भी आयोग ने कोई दख़ल नहीं दिया।
कांग्रेस की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा ये एक निजी शिकायत है, जिसमें संज्ञान नहीं लिया गया है। RP एक्ट का कानून कहता है कि कम से कम आरोप तय होने चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। कानून साफ है जब तक आरोप तय न हो, तब तक नामांकन पत्र घोषणा करना जरूरी नहीं। जिस शिकायत में मीनाक्षी का जिद्र है, और घटना का जो समय बताया गया है उस वक्त मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की प्रभारी नहीं थी, ये उनके अप्वांइट होने के 3 साल पहले की बात है।
सिंघवी ने आगे कहा’ कल मुझे अदालत में सुना नहीं गया। इसका नतीजा ये हुआ कि कोई चुनाव नहीं हुआ और दूसरा प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत गया। इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण में ये साफ हुआ था कि चुनाव के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड होना चाहिए। सिंघवी ने कहा कि चुनावी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की जगह चुनाव में इसे खत्म किया गया। इस मामले में कोई आरोप तय नहीं हुआ है, तो इसकी जानकारी उन्हें क्यों देनी चाहिए?अगर कोई क्रिमिनल केस पेंडिंग है, तो कैंडिडेट के तौर पर बताएंगी। हम लोग केन्द्रीय चुनाव आयोग भी गए थे एक घंटे तक बहस की और आयोग इस मामले पर चुप है ,यह निंदनीय है।
सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि 9 को नामांकन रद्द हुआ, 10 को हम चुनाव आयोग हुए, 11 को सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की और आज आपके सामने खड़े है। हम सुप्रीम कोर्ट से मांग करते हैं कि अब कानून के तहत न्याय हो। यहां रिर्टनिंग ऑफिसर ने 2+2 को 6 बता दिया। कानून के खिलाफ जाकर रिटर्निंग ने फैसला लिया। मीनाक्षी नटराजन को चुनाव तक लड़ने नहीं दिया गया, लड़ कर हारती या जीतती उससे तय होता। चुनाव आयोग की चुप्पी हैरान कर देने वाली है
सिंघवी ने कहा कि कल कोई चुनाव नहीं हुआ बल्कि एक तरफा नतीजे घोषित कर दिए गए। RO की जिम्मेदारी कानून का पालन करना था। जो फैसला दिया उसके हिसाब से RO का फैसला पलटना नहीं चाहिए बल्कि उसे पद से हटा देना चाहिए।
वहीं, चुनाव आयोग के वकील वी एस नायडू ने भी अपनी दलील दी। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन चुनाव आयोग गई थी लेकिन आयोग ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता था। रिटर्निंग ऑफिसर ने RP एक्ट के मुताबिक ही बीजेपी के उम्मीदवार को विजेता घोषित किया है।
इसके बाद जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हमे कोई ऐसा जजमेंट दिखाइए जिसमे हमने RO द्वारा रिजेक्ट किए जाने के बाद नॉमिनेशन स्वीकार करके मामलों में दखल दिया है, जहां पार्लियामेंट्री या लेजिस्लेटिव इलेक्शन में नॉमिनेशन के बाद हमने RO के ऑर्डर को खारिज किया हो।