उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भारी हलचल है। कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में समय से पूर्व विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। इस सुगबुगाहट के बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सहयोगियों को साधने और चुनावी चक्रव्यूह तैयार करने के लिए उलटी गिनती शुरू कर दी है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक मुलाकातों का दौर जारी है। आखिर यूपी की सियासत में पर्दे के पीछे क्या पक रहा है? सुभासपा, निषाद पार्टी और रालोद (RLD) की क्या तैयारी है? आइए इसे 5 बड़े पॉइंट्स में आसान भाषा में समझते हैं।
1. दिल्ली में राजभर-संजय निषाद की ‘सीक्रेट’ मीटिंग, क्या है मांग?
मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली आए सुभासपा (SBSP) प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और पूर्व संगठन मंत्री सुनील बंसल से मुलाकात की।
- दोनों क्षत्रपों ने भाजपा नेतृत्व के सामने साफ कर दिया है कि सीट बंटवारे को लेकर असमंजस जल्द खत्म होना चाहिए।
- भाजपा आलाकमान ने दोनों नेताओं को भरोसा दिया है कि इसी महीने के अंत तक (जून के आखिरी हफ्ते में) सीट शेयरिंग पर औपचारिक विमर्श शुरू हो जाएगा।
2. पंकज चौधरी की नई टीम तैयार: 50% नए चेहरे, वाराणसी-गोरखपुर का पेच सुलझा
यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपनी नई टीम पर अंतिम मुहर लगा दी है।
- भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी में 50 फीसदी नए चेहरों को मौका मिलने जा रहा है।
- छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में से गोरखपुर और वाराणसी को लेकर जो गतिरोध था, उसे सुलझा लिया गया है। इसी हफ्ते पंकज चौधरी अपनी ‘चुनावी टीम’ का एलान कर सकते हैं, जिसमें विभिन्न मोर्चों पर नए और युवा चेहरे दिखेंगे।
3. ‘सेवा पखवाड़ा’ के तुरंत बाद जुलाई में फाइनल रोडमैप
फिलहाल भाजपा 21 जून तक ‘सेवा पखवाड़ा’ मना रही है। इसके साथ ही केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन की नई टीम का गठन होना है।
- जैसे ही जून के अंत में केंद्रीय टीम फाइनल होगी, जुलाई महीने में भाजपा अपने सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे और साझा चुनाव प्रचार का रोडमैप फाइनल कर देगी। भाजपा का लक्ष्य जुलाई तक पूरी तरह ‘इलेक्शन मोड’ में आ जाने का है।
4. रालोद (RLD) ने क्यों भंग की कार्यकारिणी? जाट राजनीति से आगे का प्लान
2024 लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए (NDA) का हिस्सा बनी राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने यूपी में अपनी पूरी प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर सबको चौंका दिया है। इसके पीछे जयंत चौधरी का बड़ा गेम प्लान है:
- पार्टी नेतृत्व इस बात से नाराज था कि जिलों में सिर्फ ‘चेहरा चमकाने’ की होड़ मची थी और सदस्यता अभियान सिर्फ कागजों पर चल रहा था।
- रालोद अब सिर्फ ‘पश्चिमी उत्तर प्रदेश’ और ‘जाट+किसान’ की पार्टी बनकर नहीं रहना चाहती। जयंत चौधरी का टारगेट अब अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में संगठन को खड़ा करना है ताकि सीट शेयरिंग में भाजपा के सामने मजबूती से दावा ठोका जा सके।
5. क्या वाकई यूपी में समय से पहले होंगे चुनाव?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि भाजपा विपक्ष को संभलने का मौका दिए बिना, समय से पहले चुनाव कराकर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को कुचलना चाहती है। यही वजह है कि:
- सहयोगियों के दबाव से पहले ही भाजपा खुद सीट शेयरिंग निपटाना चाहती है।
- प्रचार का एक साझा और आक्रामक रोडमैप तैयार किया जा रहा है ताकि एनडीए एकजुट दिखे।
यूपी में एनडीए के अंदर इस समय ‘पहले आओ, पहले पाओ’ और ‘जो मजबूत है, वही टिकेगा’ की रणनीति पर काम चल रहा है। भाजपा जहां संगठन में 50% नए चेहरे लाकर एंटी-इन्कंबेंसी काट रही है, वहीं रालोद और निषाद-सुभासपा अपने वजूद को विस्तार देने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। जुलाई का महीना यूपी की सियासत के लिए बेहद निर्णायक होने वाला है।
