ईरान में इंटरनेट शटडाउन के दस दिन पूरे हो चुके हैं, जो देश के इतिहास में सबसे लंबे और गंभीर ब्लैकआउट में से एक है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, 8 जनवरी 2026 से शुरू हुए इस राष्ट्रव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट ने लगभग 9.2 करोड़ (92 मिलियन) नागरिकों को सभी इंटरनेट सेवाओं से पूरी तरह काट दिया है। फोन कॉल्स और टेक्स्ट मैसेजिंग में भी भारी रुकावट आई है, जिससे लोग परिवारों, दोस्तों और बाहर की दुनिया से संपर्क से वंचित हो गए हैं।बीबीसी के लेख “Fears Iran’s internet shutdown could lead to ‘extreme digital isolation'” में बताया गया है कि यह शटडाउन दिसंबर 2025 से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच लगाया गया, जो आर्थिक संकट, मुद्रा अवमूल्यन और जीवनयापन की बढ़ती लागत से शुरू हुए थे। ये प्रदर्शन जल्द ही सरकार विरोधी हो गए, जिसमें लोग रेजा पहलवी (पूर्व शाह के बेटे) का समर्थन करते नजर आए। सरकार ने इसे “बाहरी ताकतों द्वारा निर्देशित आतंकवादी गतिविधियां” बताते हुए इंटरनेट काटा, ताकि विरोधियों का समन्वय रोका जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमन की खबरें न फैलें।

इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप नेटब्लॉक्स के डेटा के हवाले से बीबीसी ने बताया कि ब्लैकआउट के बाद ईरान में इंटरनेट ट्रैफिक 0.2% से भी कम रह गया है। यह पिछले ब्लैकआउट्स (जैसे 2019 और 2022) से भी लंबा और गंभीर है। सरकार ने दावा किया है कि यह “जल्द” बहाल होगा, लेकिन ईरानवायर की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी प्रवक्ता फतेमा मोहाजेरानी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट एक्सेस मार्च के अंत में फारसी नववर्ष (नौरोज) तक नहीं लौटेगा।बीबीसी के अनुसार, यह शटडाउन केवल अस्थायी नहीं लगता; फिल्टरवॉच जैसी संस्थाओं ने खुलासा किया है कि सरकार “पूर्ण डिजिटल अलगाव” की योजना पर काम कर रही है। इसमें सामान्य नागरिकों को केवल राष्ट्रीय इंटरनेट (घरेलू नेटवर्क) तक सीमित रखा जाएगा, जबकि सरकारी मंजूरी वाले लोग ही फिल्टर्ड ग्लोबल इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेंगे। यह चीन जैसी व्यवस्था की ओर इशारा करता है, जहां असंतोष को दबाने के लिए इंटरनेट को हथियार बनाया जाता है।
इस ब्लैकआउट के कारण आर्थिक प्रभाव भी भयानक हैं। ई-कॉमर्स ठप हो गया है, एटीएम काम नहीं कर रहे, लोग नकद निकाल नहीं पा रहे, और दुकानों में कार्ड पेमेंट रुक गए हैं। शिराज जैसे शहरों में लोग भोजन और जरूरी सामान जमा कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यह दमन को छिपाने का तरीका है, जहां सुरक्षा बलों द्वारा हिंसा बढ़ी है और मौतों की संख्या हजारों में बताई जा रही है,बीबीसी ने एक्सेस नाउ और अन्य संगठनों के हवाले से कहा कि ऐसे शटडाउन अक्सर बड़े पैमाने पर हिंसा को छिपाने के लिए लगाए जाते हैं। स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट सेवाएं कुछ लोगों के लिए जीवनरेखा बनी हैं, लेकिन सरकार उन्हें भी जब्त करने की कोशिश कर रही है।यह स्थिति ईरान में सूचना के प्रवाह को पूरी तरह नियंत्रित करने की कोशिश दिखाती है, जो न केवल नागरिकों की आजादी छीन रही है, बल्कि अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इंटरनेट बहाली की मांग तेज हो रही है।