आज के तेज़-रफ्तार डिजिटल युग में फूड डिलीवरी ऐप्स जैसे स्विगी, जोमैटो, जीप्टो और ब्लिंकिट ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए 10 मिनट डिलीवरी का मॉडल अपनाया है। लेकिन इस “तेज़ डिलीवरी” की दौड़ में डिलीवरी बॉयज की जान जोखिम में पड़ रही है। 10 मिनट की सख्त टाइम लिमिट के कारण उन्हें लगातार रेसिंग करनी पड़ती है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। कई शहरों में डिलीवरी पार्टनर्स की दुर्घटनाएं आम हो गई हैं, जहां थकान, तेज़ रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण बनते हैं।
31 दिसंबर 2025 की रात, न्यू ईयर ईव पर यह मुद्दा और गहरा हो गया। गिग वर्कर्स यूनियनों जैसे इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। लाखों डिलीवरी बॉयज ने काम बंद कर दिया या ऐप से लॉगआउट कर दिया। उनका मुख्य विरोध 10 मिनट डिलीवरी मॉडल के खिलाफ था, जो उन्हें खतरनाक ड्राइविंग के लिए मजबूर करता है। यूनियनों ने सरकार से अपील की कि डिलीवरी टाइम लिमिट हटाई जाए, न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए, सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए और मनमाने आईडी ब्लॉकिंग रोकी जाए।
हड़ताल के दौरान कई शहरों में फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्रभावित हुई, जिससे न्यू ईयर पार्टी प्लान प्रभावित हुए। हालांकि, कुछ वर्कर्स मजबूरी में काम करते दिखे क्योंकि रोज़ी-रोटी की चिंता बड़ी थी। लेकिन इस विरोध ने सरकार और कंपनियों पर दबाव बनाया। जनवरी 2026 में यूनियन लेबर मिनिस्टर के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट, स्विगी और अन्य प्लेटफॉर्म्स ने 10 मिनट डिलीवरी का दावा हटाना शुरू किया, जो वर्कर्स की जीत मानी जा रही है।
यह घटना गिग इकोनॉमी की कड़वी हकीकत उजागर करती है—जहां ग्राहकों की सुविधा के लिए वर्कर्स की सुरक्षा और सम्मान दांव पर लग जाता है। सरकार को अब मजबूत कानून बनाकर इन वर्कर्स को सुरक्षा कवच देना चाहिए, ताकि तेज़ डिलीवरी का मतलब मौत की दौड़ न बने।








