नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में योगी सरकार ने तेजी से सख्त कार्रवाई की है। इस हादसे ने प्रशासनिक लापरवाही को खुलकर सामने ला दिया है, जिसके बाद सरकार ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया है। योगी सरकार की त्वरित कार्रवाईमामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया और बड़े एक्शन लिए:
- नोएडा अथॉरिटी के CEO डॉ. लोकेश एम को हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया।
- 3 सदस्यीय SIT (Special Investigation Team) का गठन किया गया, जिसे 5 दिनों के अंदर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए।
- इससे पहले ही ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को तत्काल बर्खास्त कर दिया गया।
- दो बिल्डरों (निर्माण कंपनियों) के खिलाफ FIR दर्ज की गई, क्योंकि गड्ढा बिना सुरक्षा उपायों के खुला था।
- संबंधित अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए।
- सभी विभागों को निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपायों की दोबारा जांच के निर्देश दिए गए।
- मौत का मुख्य कारण एस्फिक्सिएशन (Asphyxiation) यानी दम घुटना (एंटीमॉर्टम ड्राउनिंग के कारण)।
- फेफड़ों में पानी भरा पाया गया (कुछ रिपोर्ट्स में 200 एमएल या अधिक बताया गया)।
- इसके साथ ही कार्डियक अरेस्ट/हार्ट फेलियर भी मौत का एक कारण रहा।
- ठंडे पानी में लंबे समय तक रहने से हाइपोथर्मिया भी हुआ, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
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रिपोर्ट से साफ है कि युवराज ने ठंडे पानी में लंबी लड़ाई लड़ी, लेकिन समय पर बचाव न मिलने से दम घुटने और हार्ट अटैक ने उनकी जान ली।यह मामला अब न केवल नोएडा की सड़क सुरक्षा और निर्माण लापरवाही पर सवाल उठा रहा है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को भी कठघरे में खड़ा कर रहा है। युवराज के परिवार और स्थानीय लोगों का गुस्सा बरकरार है, जो कह रहे हैं कि अगर 10-15 मिनट पहले बचाव होता तो शायद जान बच सकती थी।योगी सरकार का यह तेज एक्शन दिखाता है कि ऐसी घटनाओं में अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। आगे SIT की रिपोर्ट से और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।


























