10 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के सोलापुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान कहता है कि भारत का कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है। पाकिस्तान के संविधान में सिर्फ एक मजहब के लोग ही उच्च पदों पर पहुंच सकते हैं, लेकिन यहां समानता है। मेरा ख्वाब है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी। मैं शायद उस दिन जिंदा न रहूं, लेकिन यह दिन जरूर आएगा।” यह बयान भारतीय संविधान की समावेशी भावना को रेखांकित करते हुए दिया गया, जिसमें ओवैसी ने मुसलमानों के खिलाफ फैलाई जा रही नफरत पर भी निशाना साधा।
बयान आते ही राजनीतिक दलों में भारी हलचल मच गई। भाजपा ने इसे “गैर-जिम्मेदाराना” और “आधा सच” करार दिया। भाजपा सांसद अनिल बोंडे ने कहा कि ओवैसी सिर्फ आधा सच बोल रहे हैं क्योंकि ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं हिजाब नहीं पहनना चाहतीं। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने तीखा हमला करते हुए कहा, “हिंदू राष्ट्र में ऐसा कोई मौका नहीं है, इसके लिए इस्लामिक देश में जाएं।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी कहा कि संविधान किसी को रोकता नहीं, लेकिन भारत हमेशा हिंदू प्रधानमंत्री वाला देश रहेगा। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने चुनौती दी कि पहले ओवैसी अपनी पार्टी में किसी पासमांदा या हिजाब वाली मुस्लिम महिला को अध्यक्ष बनाएं। कुछ हिंदू संगठनों जैसे विश्व हिंदू परिषद ने भी इसे देश की सांस्कृतिक पहचान पर हमला बताया। दूसरी ओर, ओवैसी के समर्थक इसे संवैधानिक अधिकारों और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की तीखी बहस जारी है।








