मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख सौर त्योहार और फसल उत्सव है, जो हर साल 14 जनवरी (या आसपास) मनाया जाता है। यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (उत्तरायण) का प्रतीक है, जो सर्दी के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत दर्शाता है। यह फसल कटाई का समय है, इसलिए किसान सूर्य देव, प्रकृति और फसल के लिए आभार व्यक्त करते हैं। पूरे भारत में यह त्योहार एक ही तिथि पर मनाया जाता है, लेकिन नाम, रीति-रिवाज, भोजन और उत्सव अलग-अलग हैं—यह भारत की सांस्कृतिक विविधता का बेहतरीन उदाहरण है।
गुजरात में इसे उत्तरायण कहा जाता है। यहां पतंगबाजी सबसे बड़ा आकर्षण है। लाखों लोग छतों पर इकट्ठा होकर रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाते हैं, जिसमें प्रतियोगिताएं और “काई पो चे” का नारा गूंजता है।
तमिलनाडु में यह पोंगल के नाम से चार दिनों तक मनाया जाता है—भोगी पोंगल (पुरानी चीजें जलाना), सूर्य पोंगल (चावल-दूध की खीर), मट्टू पोंगल (गाय-बैल पूजा) और कानुम पोंगल (परिवार मिलन)। घरों में रंगोली (कोलम) बनाई जाती है और मीठी पोंगल बनाई जाती है।
पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में लोहरी (मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर) प्रमुख है। अलाव जलाकर गीत-नृत्य (भांगड़ा-गिद्दा) होते हैं, मूंगफली, रेवड़ी और गुड़ चढ़ाया जाता है। यह फसल और सर्दी के अंत का उत्सव है।असम में माघ बिहू या भोगाली बिहू मनाया जाता है। मेहमाननवाजी, पिठा (चावल के केक), लारू और सामूहिक भोज होता है।आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में संकранthi या पेद्दा पंडुगा चार दिनों का त्योहार है, जिसमें रंगोली, मिठाइयां और बैल दौड़ शामिल हैं।
कर्नाटक में मकर संक्रांति, महाराष्ट्र में मकर संक्रांति या हल्दी-कुमकुम, जहां महिलाएं हल्दी-कुमकुम लगाती हैं। केरल में मकरविलक्कु (सबरीमाला में विशेष पूजा)।
उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी या मकर संक्रांति, जहां खिचड़ी बनाई जाती है और प्रयागराज में गंगा स्नान होता है। राजस्थान में सक्रात, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में सुकरात।
यह त्योहार तिल-गुड़ की मिठाइयों (तिलगुल, चिक्की), पवित्र स्नान, दान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। विभिन्न नामों के बावजूद, इसका सार एक है—सकारात्मकता, समृद्धि और नई शुरुआत।








