इंफाल/गुवाहाटी: मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के शुरुआती दिनों में यौन उत्पीड़न का शिकार हुई एक 20 वर्षीय कुकी-जो महिला की मौत हो गई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वह 11 जनवरी 2026 को चुराचांदपुर जिले के सिंगत में घर पर ही अपनी मां के पास दम तोड़ गई। हिंसा के कारण इंफाल से विस्थापित होने के बाद परिवार कांगपोकपी में एक साल से ज्यादा रहा, फिर चुराचांदपुर चला गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि महिला को 15 मई 2023 की शाम इंफाल के न्यू चेकॉन इलाके में एटीएम के पास से चार लोगों ने अगवा कर लिया। वे उसे कार में ले गए, मारपीट की, थप्पड़ मारे और फिर पहाड़ी इलाके में ले जाकर तीन लोगों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। वह किसी तरह पहाड़ी से लुढ़ककर नीचे पहुंची और भाग निकली। एक ऑटो-रिक्शा चालक ने उसे बचाया और अस्पताल पहुंचाया। शुरुआती इलाज के बाद गंभीर चोटों के कारण उसे गुवाहाटी शिफ्ट किया गया।

पीड़िता ने 21 जुलाई 2023 को कांगपोकपी पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें अपहरण, मारपीट और गैंगरेप का जिक्र था। मामला बाद में इंफाल ईस्ट के पोरॉम्पाट थाने में ट्रांसफर हुआ और सीबीआई को सौंप दिया गया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, गुवाहाटी में स्पेशल सीबीआई कोर्ट में मामला चल रहा है, लेकिन आरोपियों की पहचान या गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिवार और कुकी संगठनों का कहना है कि जांच रुकी हुई है, कोई प्रगति नहीं हुई। परिवार ने बताया कि घटना के बाद वह कभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई। “वह बीमार रहती थी, उसके दिल में डर था,” मां ने कहा। शारीरिक चोटों के साथ मानसिक आघात ने उसे लगातार परेशान किया। वह स्कूल की छात्रा थी और इंफाल में ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। हिंसा ने उसके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया।
यह मौत मणिपुर हिंसा में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के कई मामलों में से एक है, जहां न्याय में भारी देरी हुई है। कुकी-जो संगठनों जैसे इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने कैंडललाइट विजिल की और न्याय की मांग की। रिपोर्ट चेताती है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को ट्रॉमा से जूझना पड़ता है, जबकि सिस्टम की लापरवाही से न्याय अधूरा रह जाता है। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि जातीय संघर्ष में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है।