आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए अपने दिग्गज नेता और सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटा दिया है। पार्टी ने उनकी जगह अब अशोक मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी है। इस बदलाव के साथ ही राज्यसभा सचिवालय को लिखे पत्र में पार्टी ने निर्देश दिया है कि अब राघव चड्ढा को पार्टी कोटे से आवंटित होने वाले समय में बोलने का अवसर न दिया जाए।
सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा के खिलाफ यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे वरिष्ठ नेताओं को जमानत मिलने के बाद भी राघव चड्ढा की चुप्पी पार्टी नेतृत्व को अखरी।
आरोप है कि चड्ढा राज्यसभा में पार्टी के कोटे का पूरा समय खुद ले लेते थे, जिससे अन्य सांसदों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पा रहा था। माना जा रहा है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के सांगठनिक कार्यों में सक्रिय दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। आम आदमी पार्टी में आए उतार-चढ़ाव के दौरान भी उनकी खामोशी ने कई सवाल खड़े किए थे।
हाल ही में जब राज्यसभा सांसद संजय सिंह से राघव चड्ढा के किसी अन्य दल में जाने की संभावनाओं पर सवाल किया गया था, तो उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा था, “यह आप उन्हीं से पूछिए, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं, तो उनके खिलाफ होने वाले सबसे पहले व्यक्ति मैं होऊंगा।” हालांकि, उन्होंने आधिकारिक तौर पर ऐसी किसी भी संभावना को खारिज किया था, लेकिन इस बयान ने सियासी गलियारों में सुगबुगाहट जरूर बढ़ा दी थी।
साल 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद, राजेंद्र नगर के पूर्व विधायक रहे राघव चड्ढा को राज्यसभा भेजा गया था। तब से वह पार्टी के सबसे मुखर चेहरों में से एक रहे हैं। अब इस बड़े एक्शन के बाद हर किसी की नजरें राघव चड्ढा के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या यह पार्टी के भीतर बढ़ती दूरियों का संकेत है या कोई बड़ा राजनीतिक फेरबदल? इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।















