जनतंत्र टीवी के विशेष कार्यक्रम ‘सेहत Talks’ में होस्ट ज्योति गोएल ने प्रसिद्ध नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मुनींद्र कुमार (DNB नेफ्रोलॉजी, मेडिकल डायरेक्टर नेप्रस किडनी सेंटर, कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका) से किडनी संबंधी महत्वपूर्ण सवालों पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. कुमार ने किडनी स्टोन, खराबी के लक्षण और जीवनशैली के असर पर उपयोगी जानकारी साझा की।
किडनी स्टोन क्यों बनते हैं?
डॉ. कुमार के अनुसार, किडनी स्टोन मुख्य रूप से यूरिन में कैल्शियम, ऑक्सालेट, यूरिक एसिड या फॉस्फोरस जैसे पदार्थों की अधिक मात्रा से बनते हैं। कम पानी पीना सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि इससे यूरिन गाढ़ा हो जाता है और क्रिस्टल बनने लगते हैं। अन्य कारणों में हाई प्रोटीन डाइट (खासकर मीट से), ज्यादा नमक, ऑक्सालेट युक्त भोजन (पालक, चॉकलेट), मोटापा, डायबिटीज और कुछ दवाएं शामिल हैं। जेनेटिक फैक्टर या हाइपरपैराथायरॉइडिज्म भी स्टोन का जोखिम बढ़ाते हैं। पर्याप्त पानी पीने और संतुलित आहार से 80% स्टोन को रोका जा सकता है।
डॉ. कुमार के अनुसार, किडनी स्टोन मुख्य रूप से यूरिन में कैल्शियम, ऑक्सालेट, यूरिक एसिड या फॉस्फोरस जैसे पदार्थों की अधिक मात्रा से बनते हैं। कम पानी पीना सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि इससे यूरिन गाढ़ा हो जाता है और क्रिस्टल बनने लगते हैं। अन्य कारणों में हाई प्रोटीन डाइट (खासकर मीट से), ज्यादा नमक, ऑक्सालेट युक्त भोजन (पालक, चॉकलेट), मोटापा, डायबिटीज और कुछ दवाएं शामिल हैं। जेनेटिक फैक्टर या हाइपरपैराथायरॉइडिज्म भी स्टोन का जोखिम बढ़ाते हैं। पर्याप्त पानी पीने और संतुलित आहार से 80% स्टोन को रोका जा सकता है।
किडनी खराब होने के शुरुआती वार्निंग साइन्स क्या हैं?
किडनी की समस्या शुरुआत में बिना लक्षणों के बढ़ती है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। डॉ. कुमार ने बताया कि शुरुआती संकेतों में थकान, पैरों-अंकल में सूजन (एडिमा), आंखों के आसपास पफीनेस, यूरिन में झाग (प्रोटीन लीकेज), बार-बार पेशाब आना या रात में उठना, हाई ब्लड प्रेशर, एनीमिया और भूख न लगना शामिल हैं। अगर यूरिन का रंग गाढ़ा हो या पीठ में दर्द हो, तो तुरंत जांच कराएं। नियमित ब्लड और यूरिन टेस्ट से CKD (क्रॉनिक किडनी डिजीज) का पता लग सकता है।
किडनी की समस्या शुरुआत में बिना लक्षणों के बढ़ती है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। डॉ. कुमार ने बताया कि शुरुआती संकेतों में थकान, पैरों-अंकल में सूजन (एडिमा), आंखों के आसपास पफीनेस, यूरिन में झाग (प्रोटीन लीकेज), बार-बार पेशाब आना या रात में उठना, हाई ब्लड प्रेशर, एनीमिया और भूख न लगना शामिल हैं। अगर यूरिन का रंग गाढ़ा हो या पीठ में दर्द हो, तो तुरंत जांच कराएं। नियमित ब्लड और यूरिन टेस्ट से CKD (क्रॉनिक किडनी डिजीज) का पता लग सकता है।
पानी कम पीना, निर्जल व्रत, ज्यादा प्रोटीन, क्रिएटिन और पेनकिलर्स का असर?
डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि पानी कम पीना किडनी के लिए सबसे खतरनाक है – इससे डिहाइड्रेशन होता है, स्टोन बनते हैं और लंबे समय में किडनी फंक्शन कमजोर हो सकता है। निर्जल व्रत (इंटरमिटेंट फास्टिंग) स्वस्थ लोगों में सुरक्षित है और मेटाबॉलिक सिंड्रोम कम कर सकता है, लेकिन CKD वाले मरीजों में सावधानी बरतें क्योंकि इससे क्रिएटिनिन बढ़ सकता है। ज्यादा प्रोटीन डाइट स्वस्थ किडनी वालों में ठीक है, लेकिन पहले से समस्या होने पर ग्लोमेरुलर हाइपरफिल्ट्रेशन से नुकसान पहुंचा सकती है। क्रिएटिन सप्लीमेंट्स ज्यादातर सुरक्षित हैं और किडनी डैमेज नहीं करते, लेकिन हाई डोज या पहले से समस्या में डॉक्टर से सलाह लें। पेनकिलर्स (NSAIDs जैसे इबुप्रोफेन) लंबे समय तक लेने से किडनी इंजरी हो सकती है, खासकर डिहाइड्रेटेड 상태 में – ये ब्लड फ्लो कम कर देते हैं।
डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि पानी कम पीना किडनी के लिए सबसे खतरनाक है – इससे डिहाइड्रेशन होता है, स्टोन बनते हैं और लंबे समय में किडनी फंक्शन कमजोर हो सकता है। निर्जल व्रत (इंटरमिटेंट फास्टिंग) स्वस्थ लोगों में सुरक्षित है और मेटाबॉलिक सिंड्रोम कम कर सकता है, लेकिन CKD वाले मरीजों में सावधानी बरतें क्योंकि इससे क्रिएटिनिन बढ़ सकता है। ज्यादा प्रोटीन डाइट स्वस्थ किडनी वालों में ठीक है, लेकिन पहले से समस्या होने पर ग्लोमेरुलर हाइपरफिल्ट्रेशन से नुकसान पहुंचा सकती है। क्रिएटिन सप्लीमेंट्स ज्यादातर सुरक्षित हैं और किडनी डैमेज नहीं करते, लेकिन हाई डोज या पहले से समस्या में डॉक्टर से सलाह लें। पेनकिलर्स (NSAIDs जैसे इबुप्रोफेन) लंबे समय तक लेने से किडनी इंजरी हो सकती है, खासकर डिहाइड्रेटेड 상태 में – ये ब्लड फ्लो कम कर देते हैं।
डायबिटीज, हाई BP, पॉल्यूशन, स्मोकिंग और लाइफस्टाइल का असर?
डॉ. कुमार ने जोर देकर कहा कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी फेलियर के प्रमुख कारण हैं – डायबिटीज से ब्लड वेसल्स डैमेज होते हैं, जबकि BP से किडनी पर दबाव पड़ता है। दोनों मिलकर CKD का जोखिम कई गुना बढ़ाते हैं। स्मोकिंग टॉक्सिन्स से किडनी को सीधे नुकसान पहुंचाती है और BP बढ़ाती है। एयर पॉल्यूशन (PM2.5) ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर CKD रिस्क बढ़ाता है। खराब लाइफस्टाइल – मोटापा, कम व्यायाम, हाई सॉल्ट डाइट – सब किडनी को प्रभावित करते हैं। स्वस्थ वजन, नियमित एक्सरसाइज, कम नमक और स्मोकिंग छोड़ने से किडनी सुरक्षित रहती है।डॉ. मुनींद्र कुमार ने सलाह दी कि 40 साल से ऊपर वाले हर व्यक्ति को सालाना किडनी चेकअप कराना चाहिए। पानी ज्यादा पीएं, संतुलित आहार लें और डॉक्टर की सलाह बिना दवाएं न लें। किडनी स्वास्थ्य जीवन का आधार है – छोटी आदतें बदलकर बड़ा फर्क पड़ सकता है।
डॉ. कुमार ने जोर देकर कहा कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी फेलियर के प्रमुख कारण हैं – डायबिटीज से ब्लड वेसल्स डैमेज होते हैं, जबकि BP से किडनी पर दबाव पड़ता है। दोनों मिलकर CKD का जोखिम कई गुना बढ़ाते हैं। स्मोकिंग टॉक्सिन्स से किडनी को सीधे नुकसान पहुंचाती है और BP बढ़ाती है। एयर पॉल्यूशन (PM2.5) ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर CKD रिस्क बढ़ाता है। खराब लाइफस्टाइल – मोटापा, कम व्यायाम, हाई सॉल्ट डाइट – सब किडनी को प्रभावित करते हैं। स्वस्थ वजन, नियमित एक्सरसाइज, कम नमक और स्मोकिंग छोड़ने से किडनी सुरक्षित रहती है।डॉ. मुनींद्र कुमार ने सलाह दी कि 40 साल से ऊपर वाले हर व्यक्ति को सालाना किडनी चेकअप कराना चाहिए। पानी ज्यादा पीएं, संतुलित आहार लें और डॉक्टर की सलाह बिना दवाएं न लें। किडनी स्वास्थ्य जीवन का आधार है – छोटी आदतें बदलकर बड़ा फर्क पड़ सकता है।
डॉ. कुमार की सलाह: ज्यादा पानी पीएं, संतुलित आहार लें, व्यायाम करें और नियमित चेकअप कराएं। छोटे बदलाव से किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।










